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फाइबर ऑप्टिक vs वायरलेस ब्रॉडबैंड : दोनों में क्या है अंतर? यहां जानिए सबकुछ

अगर आप नया इंटरनेट कनेक्शन खरीदने का प्लान बना रहें हैं, तो आज हम आपको दोनों के फायदे और नुकसान बताने जा रहे हैं, ताकि आप सोच-समझकर फैसला ले सकें

आज ज्यादतर काम इंटरनेट की मदद से हो रहे हैं. शॉपिंग से लेकर बैंकिंग तक के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 5 अरब से अधिक लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. लोग तेजी से इंटरनेट का कनेक्शन खरीद रहे हैं. ऐसे में जब नया कनेक्शन लेने की बात आती है, तो आपके पास दो ही ऑप्शन होते हैं. पहला फाइबर ऑप्टिक और दूसरा वायरलेस ब्रॉडबैंड. हालांकि, ज्यादातर लोगों को इनके बारे में नहीं पता है और वे दोनों के बीच का अंतर भी नहीं जानते हैं. ऐसे में कई बार उनको पता नहीं होता है कि उनके लिए कौन-सा कनेक्शन खरीदना ठीक रहेगा.

अगर आप नया इंटरनेट कनेक्शन खरीदने का प्लान बना रहें हैं, तो आज हम आपको दोनों के फायदे और नुकसान बताने जा रहे हैं, ताकि आप सोच-समझकर फैसला ले सकें कि आपको अपने लिए कौन सा- कनेक्शन बेहतर रहेगा.

फाइबर ऑप्टिक

चलिए सबसे पहले आपको फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन के बारे में बताते हैं. फाइबर ऑप्टिक, फाइबर के स्ट्रेंड्स से होकर लाइट के करेंट के जरिए इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करने का एक तरीका है जो कांच या कुछ केस में प्लास्टिक से बना होता है. फाइबर ऑप्टिक डाइमीटर में इंसान के बाल के बराबर स्ट्रैंड होता है. फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन कई तरह का होता है. जैसे की सिंगल-मोड केबल मल्टी-मोड केबल, और वायरलेस ब्रॉडबैंड.

दुनिया धीरे-धीरे फाइबर-ऑप्टिक कनेक्शन की ओर बढ़ रही है, लेकिन फिर भी वायरलेस ब्रॉडबैंड की ताकत आज भी बरकरार है. वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन के सबसे बड़े फायदों में से एक यह है कि यह कुछ ही दिनों में तैयार हो जाता है और जैसे ही ग्राउंडवर्क खत्म होता है, इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

फाइबर ऑप्टिक और वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन में अंतर

फाइबर-ऑप्टिक कनेक्शन, फाइबर ऑप्टिक्स के आधार पर बनाया जाता है, जो डेटा ट्रांसमिट करने के लिए लाइट का इस्तेमाल करता है. वहीं, वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन डेटा पैकेट को एक स्पेसिफिक चैनल पर ब्रॉडकास्ट करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में परिवर्तित करके काम करता है.

दोनों की स्पीड में फर्क

फाइबर ऑप्टिक एक जैसी स्पीड प्रदान करता है, लेकिन जिस तरह से फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क कंजेस्शन को संभालता है और हाई स्पीड प्रदान करता है, इसलिए यह एक बेहतर ऑप्शन बन जाता है, खासकर जब एक नेटवर्क कई यूजर को संभाल रहा हो. वहीं, दूसरी ओर वायरलेस कनेक्शन के साथ, आपको नेटवर्क कंजेशन का सामना करना पड़ेगा जिससे लोडिंग स्लो हो जाती है.

नेटवर्क स्टेबिलिटी

फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन की स्पीड और नेटवर्क स्टेबिलिटी दूरी के अनुपात के हिसाब कम नहीं होती है. इसके विपरीत जब आप वायरलेस कनेक्शन के साथ काम कर रहे होते हैं तो दूरी कभी-कभी आपके नेटवर्क की स्पीड में बाधा डाल सकती है.

कनेक्शन लगाने में समय

शहरी और मेट्रो शहरों में फाइबर ऑप्टिक केबल लगाए जा जाते हैं, लेकिन अगर आप ग्रामीण इलाकों में रह रहे हैं, तो आपको एक विश्वसनीय कनेक्शन मिलने में कुछ समय या साल भी लग सकते हैं. दूसरी ओर, एक वायरलेस कनेक्शन दुनिया में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है.

दोनों की लागत में अंतर

फाइबर ऑप्टिक लगाने की लागत काफी महंगी है, और आपको इंटरनेट से जुड़ने में महीनों लग सकते हैं. वायरलेस कनेक्शन का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कई मायनों में सस्ता है. वायरलेस ब्रॉडबैंड सेवाएं दूर-दराज के इलाकों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान कर सकती हैं.

स्टॉलेशन प्रोसेस

अगर एक फाइबर ऑप्टिक टूट जाता है, तो उस हिस्से को बदलने की लागत काफी अधिक हो सकती है. इंस्टॉलेशन प्रोसेस काफी आसान है, और आवेदन करने के एक या दो दिनों के भीतर, आप इसे अपने कार्यालय या घर में इंस्टॉल कर सकते हैं.

कनेक्शन का अंतर

अंत में फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन हार्डवेयर के एक स्पेसिफिक सेट के साथ काम करता है, और यह भी एक ऐसी कीमत में आता है जिसमें कुछ लोग इनवेस्ट आसानी से नहीं करते हैं. इंटरनेट से जुड़ने के लिए महंगे हार्डवेयर खरीदने की जरूरत नहीं है. एक वायरलेस कनेक्शन सभी नेटवर्क हार्डवेयर के साथ काम करता है, चाहे उनकी कीमत कुछ भी हो.

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