Lok Sabha Election 2024: मायावती की गठबंधन से दूरी क्यों? बसपा सुप्रीमो ने गिनाई कई वजहें
UP Politics: बसपा सुप्रीमो ने आगामी लोकसभा चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अपने राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों पर भी विराम लगा दिया.

UP News: मायावती ने सोमवार को अपने जन्मदिन पर मीडिया को संबोधित करते हुए कई सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया. उन्होंने बीते कई दिनों से इंडिया गठबंधन के साथ जाने के लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगा दिया. उन्होंने कहा कि बीएसपी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. हालांकि मायावती के इस फैसले के पीछे कई वजह बताई जा रही है. खुद उन्होंने भी इन वजहों का जिक्र किया.
बसपा सुप्रीमो ने कहा, 'हमारी पार्टी लोकसभा केचुनाव अकेले इसलिए लड़ती है क्योंकि इसकी कमान एक दलित के हाथों में है. हमारी पार्टी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. हम किसी गठबंधन में नहीं जाएंगे. साल 2007 की तरह हमारी पार्टी लोकसभा में भी बेहतर परिणा देगी. गठबंधन करने पर हमारा वोट तो उन्हें मिल जाता है. अगर उनका वोट खासकर सवर्ण वोट हमें नहीं मिलता है.'
UP Politics: क्या राजनीति से सन्यास ले रही हैं मायावती? बसपा सुप्रीमों ने दिया ये जवाब
बसपा के लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मायावती ने कहा, 'बसपा ने अपनी सरकार के दौरान लोगों को अपने पैरों पर खड़ा किया था. पिछले कुछ वर्षों से केंद्र-राज्य सरकार धर्म-संस्कृति की आड़ में राजनीति कर रही है. विपक्ष के इंडिया गठबंधन को लेकर सपा मुखिया ने बसपा के लोगों को गुमराह करने के लिए गिरगिट की तरह रंग बदला है. उससे बसपा के लोगों को सतर्क रहना होगा.'
उन्होंने कहा, 'अगर मेरी पार्टी के कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव में अच्छे नतीजे लाते हैं तो यही मेरे लिए गिफ्ट होगा. हमारा पार्टी दलितों, आदिवासियों, अतिपिछड़ों और मुस्लिमों के साथ खड़ी है. हमारा पार्टी लोकसभा के अकेले ही लड़ेगी.' उनके इस बयान में बीते चुनावों के दौरान हुए गठबंधन के नतीजों को प्रकाश में लाने की कोशिश की गई.
कमजोर हुआ जनाधार
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी ने सपा के साथ गठबंधन किया था. हालांकि चुनाव के बाद ही ये गठबंधन टूट गया था. इस चुनाव में बीएसपी को 10 सीटें मिली थी लेकिन जब बसपा के जनाधार को काफी नुकसान पहुंचा. पार्टी के वोट बैंक में बड़ी गिरावट आई. बीते विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो पार्टी को करीब 13 फीसदी ही वोट मिले थे.
राजनीति के जानकार बताते हैं कि बसपा के ऐसे वोटर्स जो सपा के खिलाफ मायावती को वोट दिया करते थे, पार्टी के इस फैसले से खफा नजर आए. जिसके बाद उन्होंने बीजेपी का रुख कर लिया. यानी देखा जाए तो पार्टी को दोहरा झटका लगा है. एक तो बसपा केवल 10 सीट जीत पाई तो दूसरी ओर जनाधार भी कम हो गया.
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Source: IOCL























