उत्तराखंड में 19 लाख वोटरों को मिलेगा नोटिस! जानिए किसे देना होगा जवाब और कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी
Uttarakhand SIR: नोटिस उन मतदाताओं को मिलेंगे, जिनकी जानकारी पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाई है या जिनके नाम, आयु, पता, जन्मतिथि और पारिवारिक संबंधों से जुड़े विवरण में असमानता पाई गई है.

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में विसंगतियां मिलने पर करीब 19 लाख मतदाताओं को निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे. नोटिस उन मतदाताओं को मिलेंगे, जिनकी जानकारी पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाई है या जिनके नाम, आयु, पता, जन्मतिथि और पारिवारिक संबंधों से जुड़े विवरण में असमानता पाई गई है.
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का अर्थ किसी मतदाता का नाम तत्काल काटा जाना नहीं है. संबंधित मतदाता को दस्तावेज प्रस्तुत करने, अपना पक्ष रखने और गलत विवरण में सुधार कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायत स्तर पर भी सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी. नोटिस, दावों और आपत्तियों का निस्तारण 11 सितंबर तक किया जाना है.
BLO घर-घर जाकर करेंगे मतदाताओं की मदद
इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. नोटिस केवल डाक या कार्यालय के माध्यम से भेजने तक प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी. BLO संबंधित मतदाता से संपर्क कर नोटिस पहुंचाने, आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देने और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने में सहायता करेंगे.
यह भी पढ़ें: यूपी: जमानत में देरी पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, यूपी सरकार पर लगाया 50 हजार का जुर्माना
जहां जरूरत होगी, BLO मतदाता के घर जाकर दस्तावेज प्राप्त करने और संबंधित फॉर्म भरवाने में मदद कर सकते हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम केवल तकनीकी त्रुटि, जानकारी की कमी या कार्यालय तक न पहुंच पाने के कारण अंतिम सूची से बाहर न हो.
किन मतदाताओं को मिल सकता है नोटिस?
निर्वाचन विभाग की जांच में प्रदेशभर में लगभग 19.04 लाख मतदाता रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं. इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनका विवरण पुरानी आधार मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया है. कई रिकॉर्ड में मतदाता और माता-पिता की दर्ज उम्र के बीच असामान्य रूप से कम अंतर मिला है. कुछ मामलों में दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता की उम्र में भी तार्किक अंतर नहीं पाया गया. नाम या रिश्तेदार के नाम की स्पेलिंग, पता, जन्मतिथि और एक ही परिवार के सदस्यों की मैपिंग से संबंधित त्रुटियां भी सामने आई हैं.
नोटिस मुख्य रूप से इन मामलों में जारी किया जा सकता है:
नाम या उपनाम की स्पेलिंग पुराने रिकॉर्ड से अलग होना, जन्मतिथि या उम्र में असमानता, माता-पिता या दूसरे रिश्तेदार से गलत मैपिंग, पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नाम लिंक न होना, पते या सामान्य निवास की पुष्टि न होना, एक ही व्यक्ति की एक से अधिक प्रविष्टि की आशंका और फॉर्म में दी गई जानकारी का उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल न खाना.
हर मतदाता से सभी दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक मतदाता से पूरी सूची के सभी दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे. रिकॉर्ड में जिस प्रकार की विसंगति मिली होगी, उसी के अनुसार संबंधित प्रमाण देने के लिए कहा जाएगा. उदाहरण के लिए जन्मतिथि में गड़बड़ी होने पर आयु प्रमाण, पता संदिग्ध होने पर निवास प्रमाण और माता-पिता से संबंध की मैपिंग गलत होने पर परिवार या जन्म से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा जा सकता है.
सत्यापन में कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे?
निर्वाचन आयोग ने सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेजों की संकेतात्मक सूची दी है. मतदाता अपनी स्थिति के अनुसार इनमें से उपयुक्त दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है. केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम अथवा सरकारी संस्था के नियमित कर्मचारी का पहचान पत्र या पेंशनर का पेंशन भुगतान आदेश मान्य होगा.
- सरकार, स्थानीय निकाय, बैंक, डाकघर, भारतीय जीवन बीमा निगम या सार्वजनिक उपक्रम की ओर से 1 जुलाई 1987 से पहले जारी पहचान पत्र, प्रमाणपत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज भी प्रस्तुत किया जा सकता है.
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र, भारतीय पासपोर्ट और मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय का हाईस्कूल, इंटरमीडिएट अथवा अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र आयु और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में मान्य होंगे.
- राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास या मूल निवास प्रमाणपत्र भी दिया जा सकता है.
- वन क्षेत्र में रहने वाले पात्र लोगों के लिए वनाधिकार प्रमाणपत्र मान्य होगा.
- सक्षम अधिकारी द्वारा जारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या अन्य जाति प्रमाणपत्र भी सूची में शामिल है.
- जहां उपलब्ध हो, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जा सकता है.
- राज्य सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति पारिवारिक संबंधों के सत्यापन में महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी.
- सरकार की ओर से जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र भी सामान्य निवास या पते के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है.
आधार कार्ड का उपयोग निर्वाचन आयोग के निर्धारित निर्देशों के अनुसार पहचान स्थापित करने में किया जा सकता है. हालांकि आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा और केवल आधार उपलब्ध न कराने के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं काटा जाना चाहिए.
किस गड़बड़ी में कौन सा प्रमाण उपयोगी होगा?
- यदि जन्मतिथि या उम्र में गलती है तो जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रमाणपत्र या पासपोर्ट उपयोगी होगा.
- माता-पिता की उम्र या पारिवारिक संबंध की मैपिंग में त्रुटि होने पर परिवार रजिस्टर, जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता के मतदाता रिकॉर्ड या अन्य सरकारी पारिवारिक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं.
- पुरानी मतदाता सूची से नाम लिंक नहीं होने पर मतदाता स्वयं या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी का पुरानी सूची में नाम, विधानसभा क्षेत्र, भाग संख्या और क्रम संख्या उपलब्ध करा सकता है. यह जानकारी उपलब्ध न होने पर पहचान, आयु और निवास से जुड़े वैकल्पिक प्रमाण देने होंगे.
- पते या सामान्य निवास में संदेह होने पर मूल निवास प्रमाणपत्र, भूमि-मकान आवंटन पत्र, परिवार रजिस्टर या अन्य सरकारी निवास दस्तावेज देखा जा सकता है.
नोटिस का जवाब कैसे दिया जाएगा?
निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के अनुसार मतदाता नोटिस का जवाब संबंधित BLO, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के माध्यम से दे सकता है. आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर भी नोटिस के खिलाफ दस्तावेज जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.
दस्तावेजों की जांच के दौरान मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया जा सकता है. मतदाता स्वयं उपस्थित हो सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत प्रतिनिधि या परिवार के सदस्य की सहायता भी ले सकता है.
निर्वाचन अधिकारी दस्तावेजों, पुराने रिकॉर्ड और BLO की रिपोर्ट की जांच करने के बाद निर्णय करेंगे. केवल कंप्यूटर डेटा में विसंगति मिलने के आधार पर अंतिम फैसला नहीं किया जाएगा.
ड्राफ्ट सूची में 71.33 लाख मतदाता
SIR के पहले चरण के बाद जारी उत्तराखंड की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 71,33,785 मतदाताओं के नाम शामिल हैं. यह संख्या 2022 विधानसभा चुनाव की अंतिम मतदाता सूची की तुलना में करीब 8.25 लाख कम है. निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभी अंतिम सूची नहीं है और दावा-आपत्ति तथा सत्यापन के बाद संख्या बदल सकती है.
नए मतदाता 13 अगस्त तक भर सकते हैं फॉर्म-6
- जिन पात्र नागरिकों का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है, वे 13 अगस्त तक फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन ऑनलाइन मतदाता सेवा पोर्टल, वोटर हेल्पलाइन ऐप, BLO या संबंधित निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है.
- विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक, जिन्होंने किसी दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण नहीं की है और जिनका सामान्य निवास उत्तराखंड के संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में है, फॉर्म-6A के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आवेदन कर सकते हैं।
- नाम, फोटो, जन्मतिथि, पता या अन्य जानकारी में सुधार के लिए निर्धारित संशोधन फॉर्म भरना होगा. मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या अपात्र व्यक्ति के नाम पर आपत्ति भी तय प्रक्रिया के अनुसार दर्ज की जा सकती है.
15 सितंबर को आएगी अंतिम वोटर लिस्ट
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी. इसके बाद दस्तावेजों की जांच, नोटिसों की सुनवाई और सत्यापन का काम चलेगा. सभी मामलों का निस्तारण 11 सितंबर तक किया जाना है और 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.
निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट सूची में अपना नाम, उम्र, पता और पारिवारिक विवरण समय रहते जांच लें. नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें और मांगे गए दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर जमा कराएं. आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है.
























