उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया बदली, इन मापदंडों को करना होगा पूरा
उत्तराखंड में अभी तक किसी मदरसे को धार्मिक संस्था के तौर पर पंजीकरण कराना भर काफी होता था. हालांकि, मान्यता को लेकर सरकार ने प्रक्रिया में बदलाव किया है.

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता की प्रक्रिया में धामी सरकार ने कई बड़े बदलवा किए हैं, अब नई व्यवस्था में भवन की स्थिति, कक्षा में बच्चों के बैठने की जगह, बिजली-पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से लेकर बैंक खाते तक की पूरी जानकारी देनी होगी. प्राधिकरण की टीम यह भी परखेगी कि भवन किस तरह का बना है और एक कमरे में कितने विद्यार्थी बैठ सकते हैं, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मदरसे को आर्थिक सहायता कहां कहां से मिल रही है.
धार्मिक पाठ्यक्रम भी अब प्राधिकरण के हाथ में, दायरा भी बढ़ा
बताया गया कि मदरसों में पढ़ाई जाने वाली धार्मिक शिक्षा की रूपरेखा और पाठ्यक्रम अब मदरसा संचालक खुद तय नहीं कर पाएंगे, यह जिम्मेदारी भी प्राधिकरण की होगी. इसके साथ ही प्राधिकरण का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है जिसमें अब केवल इस्लामिक संस्थाएं ही नहीं बल्कि सिख, बौद्ध और ईसाई समुदाय की संस्थाएं भी शामिल होंगी.
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452 में से अब तक सिर्फ 200 ने किया आवेदन
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के तहत राज्य में कुल 452 मदरसे पंजीकृत थे, इन सभी को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नए सिरे से मान्यता लेनी होगी. अब तक इनमें से करीब 200 मदरसों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है, जिनका स्पॉट सर्वे कराया जा रहा है.
नई प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेने पर बंद होगा संस्थान
आपको बता दें कि उत्तराखंड में मदरसों को लेकर धामी सरकार का रुख अब सिर्फ छापेमारी और सीलिंग तक सीमित नहीं रहा बल्कि सरकार ने मान्यता देने का पूरा ढांचा ही बदल डाला है. सरकार ने साफ कर दिया है कि जो मदरसे नई प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेंगे, उन्हें चलने नहीं दिया जाएगा और ऐसे संस्थानों को बंद करा दिया जाएगा. फिलहाल सरकार के फैसले से स्पष्ट है कि अब उत्तराखंड में मदरसों के संचालन के लिए नई प्रक्रिया के तहत मान्यता लेनी पड़ेगी.
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