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Uttarakhand Lok Sabha Election 2024: उत्तराखंड में कई नेताओं की प्रतिष्ठा लगी दांव पर, विधायको के साथ मंत्रियों का भी परीक्षा

Uttarakhand Election News: उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होने है. इस चुनाव में विधायक के साथ प्रदेश के मंत्रियों का भी इम्तेहान होगा.

Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव के लिए मतदान 19 अप्रैल को होना है. प्रदेश में दो राष्ट्रीय पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस मैदान में है. प्रदेश में इस वक्त बीजेपी की सरकार है. इस बार के लोकसभा चुनाव में तमाम विधायको पर पार्टी की नजर है. उनका कितना प्रभाव उनकी विधान सभा में है. इसको लेकर बीजेपी संगठन हर विधायक पर नजर रखे हुए है.वर्तमान में बीजेपी के 47 विधायक है. इनमें सात धामी सरकार में मंत्री है. केंद्रीय नेतृत्व ने इन विधायकों की चुनाव सक्रियता और प्रदर्शन की परख करने के लिए पर्यवेक्षक भी लगाए थे. जो इनकी सक्रियता पर नजर रखे हुए थे और अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजेंगे.

लोकसभा चुनाव की पांचों सीटों पर बीजेपी के पांचों प्रत्याशियों के साथ सरकार के मंत्रियों और  विधायकों का भी इम्तिहान होना है. ये इम्तेहान उन पूर्व विधायक का भी है, जो पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए है. उनको ये साबित करना होगा की उनका प्रभाव आज भी उनकी विधानसभा में है या नही, चुनाव में पार्टी यह देखेगी कि भाजपा में आने के बाद पूर्व विधायकों ने पार्टी प्रत्याशियों को कितना फायदा पहुंचाया या नहीं.

प्रदेश सरकार के मंत्रियों की परीक्षा
इस बार परीक्षा प्रदेश सरकार में मौजूद सातों मंत्रियों की भी है बात की जाए तो अकेले गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल पर पार्टी प्रत्याशी को चुनाव के जीत दिलाने का दारोमदार है. हरिद्वार सीट पर प्रेमचंद अग्रवाल, टिहरी सीट पर गणेश जोशी, अल्मोड़ा सीट पर रेखा आर्य और नैनीताल सीट पर सौरभ बहुगुणा के दमखम की भी परीक्षा होनी है इन सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी है इस चुनाव में इनकी भी परीक्षा होनी है.

टिहरी संसदीय सीट की 14 विधान सभाओं में से 11 विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक है. चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के साथ साथ इन  सभी 11 विधायकों का भी इम्तिहान होना है. भाजपा ने अपने सभी विधायकों को विधानसभा चुनाव से अधिक वोट प्रत्याशी को दिलाने का लक्ष्य दिया है. पुरोला में पूर्व विधायक मालचंद, गंगोत्री में विजय पाल सिंह सजवाण और टिहरी दिनेश धनई के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके दमखम को भी परखा जाएगा. ये चुनाव इन पूर्व विधायक के दम-खम का भी इम्तेहान है.

गढ़वाल संसदीय सीट पर भाजपा के 13 विधायक हैं. बदरीनाथ सीट कांग्रेस के पास थी लेकिन चुनाव की घोषणा होते ही बद्रीनाथ से विधायक  राजेंद्र भंडारी ने कांग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे. भंडारी अब भाजपा में है. चुनाव में बनी यह परिस्थितियां भाजपा के पक्ष में तो है, लेकिन कहीं न कहीं हर विधायक पर अपने-अपने चुनाव क्षेत्र में 2022 के चुनाव से बेहतर प्रदर्शन का दबाव भी है.पार्टी ने उन्हें चुनाव क्षेत्र में बढ़त दिलाने का लक्ष्य दिया है.

हरिद्वार लोकसभा सीट की बात की जाए तो हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में 14 विधानसभा सीटें है. इनमें से छह सीटों पर भाजपा के विधायक है. इन सीटों में धर्मपुर सीट पर निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे कांग्रेस के दिनेश अग्रवाल अब भाजपा में हैं इसी तरह ऋषिकेश में चुनाव लड़े कनक धनै भी भाजपा में हैं इस सीट पर पार्टी के कई पूर्व विधायकों का भी इम्तिहान होगा. 2022 के विधानसभा चुनाव भाजपा को सबसे अधिक नुकसान हरिद्वार जिले में ही हुआ था.चुनाव में घटकर तीन सीटें रह गईं.2017 में भाजपा के पास 11 में आठ सीटें थीं.

अल्मोड़ा पिथौरागढ़ लोकसभा सीट पर भी पार्टी प्रत्याशी के साथ पार्टी के नौ विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी.इस संसदीय सीट में चंपावत सीट से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी विधायक हैं सभी विधायकों पर अपने-अपने चुनाव क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी को बढ़त दिलाने का दबाव है.

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