एक्सप्लोरर

उत्तराखंड में ट्रैकिंग पर नई नीति, रजिस्ट्रेशन से गाइड और टूर ऑपरेटर तक तय होगी जिम्मेदारी

Uttarakhand News: अब तक ट्रैकिंग से जुड़े नियम-कायदे कई विभागों में बिखरे पड़े थे. वन विभाग अलग, पर्यटन विभाग अलग, जिला प्रशासन अलग और इनके बीच तालमेल की कोई पक्की व्यवस्था नहीं थी.

उत्तराखंड के पहाड़ हर साल लाखों सैलानियों को अपनी तरफ खींचते हैं. बर्फ से ढकी चोटियां, हरे-भरे बुग्याल और घने जंगलों के बीच से गुजरते ट्रैकिंग रूट यह सब किसी को भी रोमांचित कर दें. लेकिन इसी रोमांच के बीच पिछले कुछ वर्षों में हादसे भी बढ़े हैं. 

खराब मौसम में फंसे ट्रैकर्स, समय पर सूचना न मिलने से अटके बचाव अभियान और अव्यवस्थित टूर ऑपरेटरों की वजह से कई बार जानें भी गई हैं. इन्हीं हालातों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार अब पहली बार एक समग्र और एकीकृत ट्रेकिंग नीति लाने जा रही है. वन विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया है. पर्यटन विभाग के साथ चर्चा के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा.

क्यों जरूरी थी यह नीति?

अब तक ट्रैकिंग से जुड़े नियम-कायदे कई विभागों में बिखरे पड़े थे. वन विभाग अलग, पर्यटन विभाग अलग, जिला प्रशासन अलग और इनके बीच तालमेल की कोई पक्की व्यवस्था नहीं. नतीजा यह होता था कि जब कोई हादसा होता था, तो जिम्मेदारी तय करने में ही वक्त निकल जाता था.

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल समेत कई ट्रैकिंग रूट्स पर हुई घटनाएं इस बात की गवाह हैं. विशेषज्ञ भी लंबे समय से कहते आए हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज कुछ ही मिनटों में पलट सकता है. ऐसे में बिना प्रशिक्षित गाइड, बिना सुरक्षा उपकरण और बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ट्रेक पर निकल जाना कितना जोखिम भरा है यह समझना मुश्किल नहीं.

ट्रैकिंग नियमों में पांच बड़े बदलाव

रजिस्ट्रेशन अनिवार्य- किसी भी ट्रैक पर जाने से पहले ट्रैकर्स का पंजीकरण जरूरी होगा. गाइड, पोर्टर और टूर ऑपरेटरों का भी सत्यापन होगा. इससे प्रशासन के पास हर अभियान की पूरी जानकारी रहेगी और आपात स्थिति में बचाव कार्य बिना देरी के शुरू किया जा सकेगा.

फिटनेस और अनुभव की शर्त- हर ट्रैक एक जैसा नहीं होता. आसान और कठिन ट्रैकों के लिए अलग-अलग मानक तय किए जाएंगे. चुनौतीपूर्ण रूट्स पर केवल वही जा सकेंगे जो शारीरिक रूप से सक्षम हों और जिनके पास जरूरी अनुभव हो. यह प्रावधान उन हादसों को रोकने की कोशिश है जो अक्सर अनुभवहीन ट्रैकर्स के साथ होते हैं.

गाइड और पोर्टर की सीधी जिम्मेदारी- अब गाइड केवल रास्ता दिखाने वाले नहीं रहेंगे. उन्हें ट्रैकर्स की सुरक्षा से सीधे जोड़ा जाएगा. उनकी जिम्मेदारियां लिखित रूप से तय होंगी, प्रशिक्षण अनिवार्य होगा और जवाबदेही की पक्की व्यवस्था बनाई जाएगी.

हादसे की तुरंत सूचना देना अनिवार्य- ट्रैकिंग के दौरान दुर्घटना हो, मौसम अचानक बिगड़े या कोई और आपात स्थिति आए तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत तत्काल प्रशासन को सूचित करना होगा. रिपोर्टिंग सिस्टम को इस तरह मजबूत किया जाएगा कि राहत अभियान में एक भी पल की देरी न हो.

सब कुछ एक ही पोर्टल पर- रजिस्ट्रेशन से लेकर अनुमति, सत्यापन, ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग तक सब कुछ एक समर्पित डिजिटल पोर्टल पर होगा. इससे ट्रेकर्स को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और प्रशासन को रियल टाइम निगरानी मिलेगी.

'अपनी हैसियत के हिसाब से बात करें..', असदुद्दीन ओवैसी के आने से पहले ओम प्रकाश राजभर ने दी नसीहत

उपकरण, बीमा और कूड़ा निस्तारण भी शामिल

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) ईको टूरिज्म पीके पात्रो के मुताबिक नीति में ट्रैकिंग से जुड़े लगभग सभी अहम पहलुओं को जगह दी गई है. टूर ऑपरेटरों के पास न्यूनतम जरूरी उपकरण होने की शर्त, उन उपकरणों का सत्यापन, बीमा की व्यवस्था और पहाड़ों पर बढ़ते कूड़े की समस्या से निपटने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन प्रावधान यह सब नीति का हिस्सा होंगे.

यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी, 13 से 18 जून तक होगा दावेदारों का इंटरव्यू

पात्रों ने यह भी कहा कि इस नीति के लागू होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा और साहसिक पर्यटन के व्यवस्थित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

प्रमुख सचिव वन रमेश कुमार सुधांशु के अनुसार मसौदे के हर बिंदु की गहन समीक्षा हो रही है. पर्यटन विभाग के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर कैबिनेट के सामने रखा जाएगा.

यह नीति सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है यह उन तमाम परिवारों की उम्मीद भी है जिनके अपने पहाड़ों में फंसे या हादसे का शिकार हुए. अगर यह नीति सही तरीके से लागू हो गई, तो उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित होंगे, बल्कि देश-दुनिया के साहसिक पर्यटकों के लिए और भी भरोसेमंद गंतव्य बनेंगे.

आलोक सेमवाल उत्तराखंड के देहरादून की खबरों पर नजर रखते हैं. एबीपी लाइव के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन BA hons मास कम्यूनिकेशन HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर भावुक हुईं मायावती, कही ये बात
रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर भावुक हुईं मायावती, कही ये बात
रसड़ा से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से थे पीड़ित
रसड़ा से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से थे पीड़ित
जल्दी अमीर बनने की चाहत ने पहुंचाया जेल, ठगी केस में पिता-पुत्री गिरफ्तार
जल्दी अमीर बनने की चाहत ने पहुंचाया जेल, ठगी केस में पिता-पुत्री गिरफ्तार
सीतापुर में बच्चों के हक में कौन डाल रहा डाका? मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सीतापुर में बच्चों के हक में कौन डाल रहा डाका? मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
Advertisement

वीडियोज

गोरखपुर की लेडी नटवरलाल का करोड़ों वाला मायाजाल!
Pati Brahmachari:💔Isha-Suraj के बीच फिर आई Avni, तकरार के बीच पनपने लगा प्यार। #sbs
Bollywood News: बिग बॉस के टीज़र से मचा तहलका: क्या टीवी पर फिर दिखेगी 'करण-अर्जुन' की जोड़ी? ( 05.08.26 )
Jharkhand Job Protest: झारखंड नौकरी आंदोलन से घिरी सरकार! इस्तीफा देंगे हेमंत सोरेन? ABPLIVE
Mannat: Dhairya का खतरनाक खेल फेल, Mannat ने बचा लिया Vikrant को मौत के मुंह से!
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मानसून सत्र का बढ़ेगा समय या बुलाया जाएगा विशेष सत्र? सरकार ने किया साफ
मानसून सत्र का बढ़ेगा समय या बुलाया जाएगा विशेष सत्र? सरकार ने किया साफ
'संप्रभुता का अपमान', शेख हसीना की PC से भड़क उठी बांग्लादेश सरकार
'संप्रभुता का अपमान', शेख हसीना की PC से भड़क उठी बांग्लादेश सरकार
यूपी चुनाव पर राहुल गांधी की बड़ी बैठक, बनाया ये खास मास्टर प्लान!
यूपी चुनाव पर राहुल गांधी की बड़ी बैठक, बनाया ये खास मास्टर प्लान!
वैभव सूर्यवंशी का भी होगा कांबली और शॉ जैसा हाल? दिग्गज के बयान से दुनिया हैरान 
वैभव सूर्यवंशी का भी होगा कांबली और शॉ जैसा हाल? दिग्गज के बयान से दुनिया हैरान 
ऋषभ पंत, संजू सैमसन या ईशान किशन, किसे मिलना चाहिए 2027 वनडे वर्ल्ड कप में मौका? 
ऋषभ पंत, संजू सैमसन या ईशान किशन, किसे मिलना चाहिए 2027 वनडे वर्ल्ड कप में मौका? 
Xप्लेन: विकसित भारत के ख्वाब के बीच कुपोषण ने 'दोहरी तस्वीर' कैसे बना दी?
विकसित भारत के ख्वाब के बीच कुपोषण ने 'दोहरी तस्वीर' कैसे बना दी?
'पाकिस्तान कर रहा यौम-ए-इस्तेहसाल की नौटंकी', भारत बोला- बंद करो प्रोपेगेंडा
'पाकिस्तान कर रहा यौम-ए-इस्तेहसाल की नौटंकी', भारत बोला- बंद करो प्रोपेगेंडा
परिसीमन बिल पर सरकार ने मांगा समर्थन तो अड़ गए राहुल गांधी, बोले- 'No, पहले...'
परिसीमन बिल पर सरकार ने मांगा समर्थन तो अड़े राहुल, बोले- 'पहले सदन में आएं गृहमंत्री'
Embed widget