उत्तराखंड में गहराया बिजली संकट, 5 करोड़ यूनिट के पार पहुंची मांग, कटौती ने किया परेशान
Uttarakhand News: उत्तराखंड में बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए पांच करोड़ यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि उपलब्धता इससे काफी कम है.

उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट भी गहराता जा रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए पांच करोड़ यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि उपलब्धता इससे काफी कम है. मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण राज्यभर में बिजली कटौती करनी पड़ रही है, जिससे आम जनता से लेकर उद्योग तक प्रभावित हो रहे हैं.
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच बिजली की मांग में करीब 90 लाख यूनिट का इजाफा हुआ है. तापमान में लगातार बढ़ोतरी के चलते कूलर, पंखे और एसी का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है. शुक्रवार को स्थिति यह रही कि कुल मांग पांच करोड़ यूनिट से अधिक पहुंच गई, जबकि उपलब्ध संसाधनों से इतनी बिजली जुटाना संभव नहीं हो पाया.
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बिजली आपूर्ति पर एक नजर
बिजली आपूर्ति की स्थिति पर नजर डालें तो राज्य पूल से करीब 1.1 करोड़ यूनिट और केंद्रीय पूल से 1.5 करोड़ यूनिट बिजली मिल रही है. इस तरह कुल मिलाकर यूपीसीएल के पास 2.7 करोड़ यूनिट बिजली ही उपलब्ध हो पाई. इसके बाद भी बिजली की कमी को पूरा करने के लिए निगम ने बाजार से लगभग 1.5 करोड़ यूनिट और अन्य माध्यमों से 34 लाख यूनिट बिजली खरीदी.
इसके बावजूद कुल आपूर्ति 4.6 करोड़ यूनिट तक ही पहुंच सकी. इस तरह रोजाना करीब 30 लाख यूनिट की कमी बनी हुई है, जिसके कारण मजबूरी में कटौती करनी पड़ रही है.कटौती का असर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में देखा जा रहा है. हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों को फिलहाल राहत दी गई है, लेकिन मैदानी इलाकों में लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई घंटे तक बिजली कटौती
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई घंटे तक बिजली कटौती की गई. वहीं छोटे कस्बों जैसे लंढौरा, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, ढकरानी, सेलाकुई, सहसपुर, विकासनगर, डोईवाला, कोटद्वार, ज्वालापुर, जसपुर, किच्छा, खटीमा, रामनगर, गदरपुर और बाजपुर में भी दो से ढाई घंटे तक बिजली नहीं रही.
आम जनजीवन पर पड़ रहा बिजली कटौती का असर
बड़े शहरों में भी स्थिति बेहतर नहीं है. काशीपुर में करीब एक घंटे, रुड़की और हल्द्वानी में डेढ़ घंटे तथा ज्वालापुर में लगभग सवा घंटे की कटौती की गई. इसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ा है. गर्मी के बीच बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए हालात और भी कठिन हो गए हैं.
उद्योग भी हो रहे हैं कटौती प्रभावित
उद्योग क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है. स्टील उद्योगों में करीब 12 घंटे तक बिजली कटौती की गई, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है. उद्योगपतियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा.
आगे की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है. ऊर्जा निगम का अनुमान है कि आने वाले सप्ताह में बिजली की मांग 5.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है. वहीं, बिजली बाजार में दरें काफी महंगी हो गई हैं और पीक आवर में बिजली मिलना भी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में यूपीसीएल के सामने पर्याप्त बिजली की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है.
कुल मिलाकर, प्रदेश में गर्मी के साथ बिजली संकट ने गंभीर रूप ले लिया है. यदि जल्द ही आपूर्ति बढ़ाने या मांग को नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं.
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Source: IOCL

























