बारिश और बर्फबारी के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, जानें- अब कहां होंगे दर्शन
उत्तराखंड में इस यात्रा वर्ष 1 लाख 35 हजार 23 श्रद्धालुओं ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए. कपाट बंद होने के मुहूर्त पर हुई बर्फबारी को शुभ मानते हुए धाम पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस अवसर पर समस्त प्रदेश वासियों की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की.

रुद्रप्रयाग: करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान केदारनाथ धाम के कपाट परंपरा के अनुसार और वैदिक उच्चारण के साथ आगामी 6 माह के लिए बंद कर दिए गए हैं. अगले 6 महीने बाबा केदार ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे. बारिश और बर्फबारी के बीच विश्व प्रसिद्ध 11वें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट भैया दूज के अवसर पर प्रातः 8.30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए गए.
1 लाख 35 हजार 23 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन प्रातः तीन बजे मंदिर को खोला गया और श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए. इसके बाद मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने बाबा की समाधि पूजा संपन्न की और साढे छह बजे भगवान भैरवनाथ को साक्षीमानकर गर्भगृह को बंद किया गया. ठीक साढ़े आठ बजे सभा मंडप और मुख्य द्वार को बंद किया गया. इस अवसर पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्तिथ रहे. इस यात्रा वर्ष 1 लाख 35 हजार 23 श्रद्धालुओं ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए. बाबा के जयघोष के साथ डोली ने प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए प्रस्थान किया.

सीएम रावत ने की सुख-समृद्धि की मंगल कामना कपाट बंद होने के मुहूर्त पर हुई बर्फबारी को शुभ मानते हुए धाम पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस अवसर पर समस्त प्रदेश वासियों की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही केदारनाथ नये स्वरूप में देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनेगा. केदारनाथ आने वाले मार्गों के सुदृढीकरण के साथ ही धाम में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से निरन्तर यहां संचालित कार्यों का अनुश्रवण किया जा रहा है. निर्माण कार्यों में स्थानीय, पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व को संजोए रखने के साथ ही स्थानीय स्थापत्य कला पर भी ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण कार्यों के साथ निकटवर्ती आध्यात्मिक स्थलों को भी इससे जोड़ा जा रहा है.

गदगद दिखे सीएम योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कपाट बंद होने पर हो रही बर्फबारी से गदगद दिखे. उन्होंने कहा कि उन्हें 12 वर्षों के बाद बाबा केदारनाथ के चरणों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. वर्ष 2013 में आई त्रासदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी के विजन एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के नेतृत्व में केदारनाथ का पुनरुद्धार का कार्य युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है. देश-विदेश के श्रद्धालुओं के विश्वास बहाली में उत्तराखंड सरकार ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ पुनर्निर्माण का बेहतरीन कार्य किया है.

मिलती है प्रेरणा सीएम योगी आदित्यनाथ ने देवभूमि उत्तराखंड के साथ ही बाबा केदारनाथ को नमन करते हुए कहा कि पौराणिक महत्व के इस श्रद्धा के केन्द्र का सुनियोजित ढंग से किए जा रहे पुनर्निर्माण कार्य निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के विश्वास बहाली में मददगार हुआ है. उन्होंने कहा कि केदारनाथ के प्रति करोड़ों लोंगों की आस्था है, यही आस्था भारत की अस्मिता, भारत के सांस्कृतिक केन्द्र भारत को भारत बनाने में मदद करते हैं. पूजा के समय उन्हें बाबा केदार के दर्शनों की प्रेरणा मिलती रही है.

कोई विवाद नहीं योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की परिसंपत्तियों के विवाद पर कहा कि दोनों राज्यों में अब किसी तरह का कोई विवाद नहीं है. अलकनंदा अतिथि गृह हरिद्वार के विषय में उन्होंने कहा कि ये मामला उच्च न्यायालय में भी लंबित रहा जिसको लेकर आपसी सहमति से इसे उत्तराखंड सरकार को दिए जाने पर सहमति बनी और यहीं पर एक अन्य अतिथि गृह बनाया गया है, जिस पर यूपी सरकार का स्वामित्व होगा. उन्होंने केदारनाथ धाम में हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की. कहा कि पीएम मोदी के कुशल मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार की तरफ से यहां बेहतर कार्य किए जा रहे हैं.

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया नृत्य इससे पहले रविवार की शाम केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद आर्मी की बैंड धुनों में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नृत्य किया और यूपी के सीएम योगी तालियां बजाते रहे. करीब आधे घंटे तक दोनों सीएम मंदिर परिसर में रहे. भारी बर्फबारी में ही केदारनाथ की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई.
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