Uttarakhand News: 4600 से ज्यादा वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा गायब, 5 जून के बाद से होगा एक्शन
Uttarakhand News In Hindi: उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों में से साढ़े चार हजार से अधिक का ब्यौरा सरकार के उम्मीद पोर्टल पर दर्ज ही नहीं है. जिसे लेकर केंद्र सरकार ने तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी थी.

उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां राज्य में 7 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियों में से साढ़े चार हजार से अधिक का ब्यौरा केंद्र सरकार के 'उम्मीद पोर्टल' पर दर्ज ही नहीं है. यह महज लापरवाही नहीं मानी जा रही, बल्कि सरकार को संदेह है कि इनमें से बड़ी तादाद में संपत्तियां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर बनाई गई हैं और बाद में वक्फ बोर्ड में चढ़ा दी गई हैं. अब धामी सरकार ने इन संपत्तियों के भूमि रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं.
सरकार ने वक्फ संपत्तियों के लिए किए नए नियम लागू
वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार ने नए नियम लागू किए हैं. इसके तहत सभी कब्जेदारों को दिसंबर 2025 तक अपनी संपत्तियों की जानकारी और दस्तावेज 'उम्मीद पोर्टल' पर अपलोड करने थे. राज्य और केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए और मुतवल्लियों को पोर्टल इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग भी दी गई. इसके बाद भी बड़ी संख्या में संपत्तियां छूट गईं तो केंद्र ने तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत देते हुए फरवरी 2026 तक का वक्त दिया. लेकिन उत्तराखंड में फिर भी तस्वीर नहीं बदली.
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पोर्टल पर 7,288 संपत्तियां में से केवल 1,597 संपत्तियां अप्रूव
राज्य में कुल 7,288 संपत्तियां सूचीबद्ध थीं, इनमें 2,105 औकाफ संपत्तियां और 5,183 अन्य संपत्तियां जैसे मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह, मजार, इमामबाड़ा और स्कूल शामिल थे. मगर पोर्टल पर अब तक केवल 1,597 मस्जिद-मदरसे जैसी संपत्तियां अप्रूव होकर दर्ज हुई हैं और 2,105 औकाफ संपत्तियां दर्ज की गई हैं. यानी 3,791 मस्जिद, मदरसे, ईदगाह और मजार तथा 841 औकाफ संपत्तियां मिलाकर कुल 4,632 संपत्तियों के कब्जेदारों ने पोर्टल पर कोई जानकारी नहीं दी.
बड़ी संख्या में लोग जानकारी देने से क्यों बच रहे?
सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग जानकारी देने से क्यों बच रहे हैं? जानकारों का कहना है कि असल वजह यह है कि इनमें से अधिकांश संपत्तियों के पास जमीन के पुख्ता कागज हैं ही नहीं है. आशंका यह भी है कि राज्य गठन के बाद से देवभूमि में वक्फ संपत्तियों में ढाई गुना की बेतहाशा वृद्धि हुई है और इस दौरान सरकारी जमीनों पर कब्जा कर इस्लामिक सेंटर, मदरसे और मजारें बनाई गईं और उन्हें वक्फ बोर्ड में दर्ज करा दिया गया.
अब जब पोर्टल पर जमीन के असली दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो कब्जेदार चुप हैं. कुछ लोग जानकारी न होने का बहाना बना रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से दी गई ट्रेनिंग और मुस्लिम अधिवक्ताओं के सहयोग के बाद यह तर्क नहीं टिकता.
5 जून के बाद से होगी सीधी कार्रवाई
अल्पसंख्यक मामले के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने साफ कहा कि 5 जून तक जो संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें अवैध कब्जा मानकर सरकार अपने अधीन कर लेगी. इन सभी संपत्तियों के भूमि रिकॉर्ड की पड़ताल अभी से शुरू हो चुकी है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी दो टूक कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने पर्याप्त समय और मौका दिया है. अब भी जो संपत्तियां दर्ज नहीं करवाई जाएंगी, उनके खिलाफ सख्त नियमों के तहत कार्रवाई होगी और संपत्ति सरकार में निहित करने का प्रावधान भी इसमें शामिल है.
























