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हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी, DGRE ने जारी किया अलर्ट, पर्यटकों से खास अपील

Uttarakhand: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ा. DGRE ने चमोली में 3000 मीटर से ऊपर के इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया. उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर में येलो अलर्ट.

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की बिगड़ती परिस्थितियों के बीच हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है. रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE), चंडीगढ़ ने प्रदेश के लिए एवलांच वार्निंग जारी की है. चेतावनी के तहत चमोली जिले में तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है.

DGRE की ओर से जारी अलर्ट के अनुसार यह चेतावनी आज शाम पांच बजे तक प्रभावी रहेगी. हालिया बर्फबारी और मौसम में आए बदलाव के चलते ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ की परतें अस्थिर हो गई हैं, जिससे हिमस्खलन की आशंका बढ़ गई है. विशेष रूप से दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जोखिम अधिक बताया गया है. चमोली जिले में जहां ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहां स्थिति अधिक गंभीर मानी जा रही है. इस क्षेत्र में 3000 मीटर से ऊपर के इलाकों में हिमस्खलन का खतरा अधिक है.

 आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर

हिमस्खलन की चेतावनी को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. आपदा सचिव ने संबंधित जिलों के प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार रखें. राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.

 पर्यटकों और ट्रेकर्स से अपील

प्रशासन ने पर्यटकों, ट्रेकर्स और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अलर्ट अवधि के दौरान संभावित हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें. खासतौर पर ऊंचाई वाले ट्रैक, बर्फीले ढलान और दुर्गम मार्गों पर आवाजाही न करने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही सीमा से सटे और चारधाम मार्गों के ऊपरी हिस्सों में भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. पर्यटकों से कहा गया है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी जोखिम भरे क्षेत्र में न जाएं.

 क्यों बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

हालिया बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ की मोटी परतें जम गई हैं. मौसम में अचानक बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ये परतें अस्थिर हो गई हैं. जब बर्फ की परतें अस्थिर होती हैं तो हिमस्खलन का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद कुछ दिनों तक हिमस्खलन का खतरा सबसे अधिक रहता है. इस दौरान बर्फ की परतें जमी नहीं होतीं और किसी भी कंपन या दबाव से खिसक सकती हैं.

चमोली जिले में बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी जैसे क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं. इसी तरह उत्तरकाशी में गंगोत्री, यमुनोत्री के ऊपरी इलाके, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ मार्ग के ऊंचे हिस्से भी जोखिम में हैं. पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भी कई ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं जहां हिमस्खलन का खतरा रहता है. इन सभी क्षेत्रों में प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.

 स्थानीय लोगों को भी सावधान रहने की सलाह

स्थानीय लोगों से भी कहा गया है कि वे अलर्ट अवधि के दौरान खास सतर्कता बरतें. जो लोग ऊंचाई वाले इलाकों में रहते हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे अपने घरों में सुरक्षित रहें और बिना जरूरत बाहर न निकलें. पशुपालकों को भी कहा गया है कि वे अपने पशुओं को संवेदनशील क्षेत्रों में चराने न ले जाएं. स्थानीय लोगों से यह भी कहा गया है कि वे किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें.

 बचाव दल तैयार

जिला प्रशासन ने बचाव दलों को पूरी तरह तैयार रखा है. एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें अलर्ट पर हैं. इन टीमों के पास हिमस्खलन से बचाव के लिए जरूरी उपकरण और प्रशिक्षण है. आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जरूरी संसाधन जुटा लिए हैं. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के लिए नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय किया गया है.

मौसम विभाग लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. DGRE के वैज्ञानिक भी लगातार बर्फ की परतों और हिमस्खलन के खतरे का आकलन कर रहे हैं. अगर स्थिति में कोई बदलाव होता है तो तुरंत अपडेट जारी किया जाएगा. राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार मौसम और हिमस्खलन की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात सामान्य होने तक लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी.

 आपात स्थिति में कैसे करें संपर्क

किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क करने की अपील की गई है. आपदा प्रबंधन विभाग का हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे सक्रिय रहता है. स्थानीय प्रशासन ने भी अपने-अपने जिलों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं. पर्यटकों और स्थानीय लोगों से कहा गया है कि वे इन नंबरों को अपने पास रखें और जरूरत पड़ने पर संपर्क करें.

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