यूपी में 18 जिलों में SIR बिगाड़ सकता है BJP का खेल? मेयर तक बोल रहे- मत शिफ्ट कराओ वोट
UP SIR Update: उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया ने भारतीय जनता पार्टी के माथे पर शिकन ला दिया है. शहरी इलाकों से ग्रामीण इलाकों में शिफ्ट हो रहे वोट, उसका संकट आगामी चुनावों में बढ़ा सकते हैं.

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आहूत मतदाता गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उत्तर प्रदेश में प्रक्रिया अंतिम चरण में जारी है. दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में प्रक्रिया की तारीखों को बढ़ाया जा सकता है. हालांकि इस पर अंतिम फैसला भारत निर्वाचन आयोग को ही लेना है. इस बीच भारतीय जनता पार्टी के माथे पर शिकन बढ़ती जा रही है.
दरअसल, यूपी के कई जिलों में भारतीय जनता पार्टी इस बात से चिंतित है कि लोग शहरों के बजाय अपना वोट गांव में रखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं लोगों की कोशिश है कि अगर वह किसी अन्य बड़े शहर में निवास भी कर रहे हों तब भी उनका वोट गांव में हो. मतदाताओं का मानना है कि वह भले ही गांव में साल में 1-2 बार जायें लेकिन वह अपना रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते. इसके अलावा अगले साल पंचायत चुनाव भी हैं. ऐसे में पंचायत चुनाव के भावी उम्मीदवार अभी से मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए उनके एसआईआर की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं.
दूसरी ओर शहरों में एक बड़ी आबादी है जिसने या तो एसआईआर फॉर्म लिए नहीं या ले लिए तो अब तक बीएलओ को वापस नहीं किए. अब जबकि प्रक्रिया में आखिर 24 घंटे बचे हैं ऐसे में बीजेपी की परेशानी बढ़ गई है.
राज्य में जारी प्रक्रिया से वाकिफ लोगों की मानें तो उन जिलों में जहां समाजवादी पार्टी के विधायक या सांसद या जन प्रतिनिधि हैं, वहां सपा ने एक्टिव होकर मतदाताओं की मदद की. वहीं भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक तौर पर एसआईआर की प्रक्रिया के आखिरी दिनों में एक्टिव हुई. माना जाता है कि बीजेपी को शहरों में बड़े तादाद में लोग वोट करते हैं. ऐसे में लोगों का शहर से गांव शिफ्ट होना और शहरी मतदाताओं द्वारा फॉर्म लेना या फिर जमा न करने से बीजेपी के सामने दिक्कत आ सकती है.
क्यों बढ़ी बीजेपी की चिंता?
SIR को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर चिंता इतनी बढ़ती जा रही है कि मुरादाबाद के मेयर और भाजपा नेता विनोद अग्रवाल ने शहरी मतदाताओं से अपील तक की है. उनका कहना है कि जो मतदाता शहर में रह रहे हैं वह अपना वोट शहर में ही रखें अपने पैतृक गांव में वोट शिफ्ट करने की जरूरत नहीं है. अग्रवाल का कहना है कि जब आप शहर में रह रहे हैं और शहर की सुविधाओं का लाभ ले रहे हो तो फिर जिस शहर में रह रहे हो वहीं अपना वोट रखें. बीजेपी नेता मतदाताओं से SIR का फार्म समय से भरने की भी अपील कर रहे हैं.
दावा किया जा रहा है कि वोटर लिस्ट में लोगों द्वारा गांवों की ओर शिफ्ट होने के फैसले का असर करीब 18 जिलों में पड़ रहा है. इसमें प्रमुखतः लखनऊ, गोरखपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, कानपुर, आगरा, मुरादाबाद, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोज़ाबाद, झांसी, शाहजहांपुर, वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, सहारनपुर शामिल हैं. उन जिलों में लोग अपना वोट ज्यादा गांवों की ओर शिफ्ट कर रहे हैं जहां वह नौकरी या रोजगार के सिलसिले में निवास कर रहे हैं.
उपरोक्त जिलों में अधिकतर क्षेत्र शहरी हैं. बीजेपी के सदंर्भ में माना जाता है कि शहरी इलाकों में उसका प्रभाव ज्यादा है. ऐसे में अगर शहरी इलाकों में ही लोग अपना वोट ग्रामीण इलाकों में शिफ्ट कराएंगे तो यह उसके लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है.
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Source: IOCL



























