रामपुर में गुरुद्वारे में पैसों के गबन का आरोप, दो गुटों में हिंसक झड़प, सीएम योगी तक पहुंची शिकायत
Rampur News: रामपुर की बिलासपुर तहसील इलाके में गुरुद्वारे की प्रबंध कमेटी विवाद में पैसों के गबन का मामला तूल पकड़ चुका है जिसमें दो गुटों में दो बार झड़प हो चुकी है.मामला सीएम योगी तक पहुंचा है.

उत्तर प्रदेश के रामपुर के बिलासपुर इलाके में स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह, पसियापुर के प्रबंध कमेटी विवाद में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन का मामला तूल पकड़ता चला जा रहा है. यहां दो गुटों में दो बार हिंसक भिड़ंत तक हो चुकी है और शिकायत यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक जा पहुंच चुकी है.
यहां आक्रोशित गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के लोगो ने जिला प्रशासन पर एक पक्ष से मिली भगत कर 3 करोड़ से अधिक का दान हड़पने का आरोप लगाते हुए बैनर लगा कर पुलिस प्रशासन के लिए चंदा इकट्ठा करने का आवाहन कर दिया है. कल गुरुद्वारा परिसर में दो गुटों में झड़प हो गई और कुछ महिलाओं ने दो महिलाओं को यहां दौड़ा दौड़ा कर पीट दिया. तनाव को देखते हुए गुरुद्वारा परिसर में पुलिस पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है.
ये है पूरा मामला
बिलासपुर इलाके के गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह पसियापुरा नवाब गंज की प्रबंध कमेटी और यहां के सेवादारों ने बताया कि इस गुरुद्वारे में हर महीने लगभग 25 लाख का दान आता है और पिछले 13 महीनों के दान का हिसाब उस व्यक्ति ने नहीं दिया जिसे जिला प्रशासन ने यहां बैठाया था इसी को लेकर विवाद चल रहा है. पिछले दिनों प्रबंध कमेटी के लोगो ने लखनऊ पहुंच कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और मामले से अवगत कराया तो उसके बाद जांच हुई और अब प्रबंध कमेटी का इस गुरुद्वारे पर कब्जा हो गया है लेकिन प्रबंध कमेटी पिछले 13 महीनों के चंदे का हिसाब मांग रही है.
प्रबंध कमेटी के लोग एक स्थानीय नेता और पुलिस प्रशासन पर गुरुद्वारे में आये करोड़ो रूपये के दान को हड़प लेने का आरोप लगा रहे हैं. इस मामले में पुलिस प्रशासन के अधिकारी कैमरे पर आकर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं वहीं गुरुद्वारे की प्रबंध कमेटी और पर कब्जे को लेकर तनाव बना हुआ है. सिख समाज के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय तक गुरुद्वारे के दानपात्र में आए करोड़ों रुपये की कथित तौर पर बंदरबांट की गई. हैरानी की बात यह है कि इस आरोप में सफेदपोश नेता, अधिकारी और स्थानीय प्रभावशाली लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं.
शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों ने कई बार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और यहां तक कि मंत्री बलदेव सिंह औलख से शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. अंततः गुरुद्वारा कमेटी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर न्याय की गुहार लगाई. मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर मुरादाबाद आंजनेय कुमार सिंह को जांच का आदेश दिया. जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद गुरुद्वारे का प्रबंधन दोबारा कमेटी को सौंपा गया. रामपुर के पूर्व डीएम रविंद्र कुमार मादंड़ के कार्यकाल में बनी निगरानी समिति के दौरान केवल 11 महीनों में गुरुद्वारे के खाते में ₹2.5 करोड़ की राशि जमा हुई थी. लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद, 13 महीनों तक न तो कोई लेखा-जोखा सामने आया, न ही बैंक खाते में पैसे जमा हुए.
आरोप है कि इस दौरान करीब रु 3.5 करोड़ की राशि का गबन किया गया. गुरुद्वारा कमेटी का दावा है कि तत्कालीन कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह फौजी और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह हेराफेरी की गई. आरोप यह भी है कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से मामले को दबाने की कोशिश हुई. गुरुद्वारा कमेटी लोगो ने बताया कि कुछ लोगों ने गुरुद्वारा संख्या 56 की जमीन पर कब्जे की कोशिश की और इसे संख्या 57 बताकर विवाद खड़ा किया. लेकिन कोर्ट से लेकर कमिश्नर की जांच रिपोर्ट तक में स्पष्ट हो चुका है कि गुरुद्वारा 56 नंबर पर ही स्थित है. उन्होंने कहा कि हम पिछले 13 महीने में हुए घोटाले की जांच चाहते हैं.
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Source: IOCL





















