यूपी: आगरा के बाद बस्ती से भी जुड़े KGMU धर्मांतरण के तार! मेडिकल कॉलेज में बढ़ाई गई सुरक्षा
Basti News: धर्मांतरण के मामले में बस्ती मेडिकल कॉलेज भी सुर्खियों में है, जिसमें हिंदूवादी नेताओ का कहना है कि बस्ती मेडिकल कॉलेज कई मौलबी अंदर जाते हैं और धर्म के आधार वाली शिक्षा दी जाती थी.

लखनऊ KGMU में धर्मांतरण मामले के तार आगरा के बाद बस्ती मेडिकल कॉलेज में जुड़ने के बाद कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया है जिसके बाद कॉलेज में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मेडिकल कॉलेज में दाखिल होने वाले प्रत्येक गाड़ी व आने जाने वालों की गहनता से चेकिंग की जा रही है.
आपको बता दें कि धर्मांतरण के मामले में बस्ती मेडिकल कॉलेज भी सुर्खियों में है, जिसमें हिंदूवादी नेताओ का कहना है कि बस्ती मेडिकल कॉलेज कई मौलबी अंदर जाते हैं और धर्म के आधार वाली शिक्षा दी जाती थी और इतना ही मेडिकल कॉलेज के पढ़ने वाले छात्र कालेज परिसर के बाहर बने मस्जिद में जाते हैं और वहां नमाज पढ़ते है. धर्मांतरण मामला आने के बाद बस्ती पुलिस जाँच में जुट गई है.
दरअसल बस्ती कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित रामपुर महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज इन दिनों धर्मांतरण को लेकर सुर्खियों में हैं. बस्ती मेडिकल कालेज में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के साथ कथित रूप से धर्मांतरण से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं. इस संबंध में पुलिस अधीक्षक बस्ती को एक शिकायती पत्र देकर त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है. शिकायत में दावा किया गया है कि केजीएमयू लखनऊ, आगरा और बस्ती के मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण का कथित नेटवर्क सक्रिय है, जिसके तार बस्ती जनपद से भी जुड़े बताए जा रहे हैं.
आरोप है कि रामपुर मेडिकल कॉलेज में कुछ छात्र-छात्राओं को स्थानीय मौलवियों के इशारे पर मदरसों में नमाज पढ़ने के लिए भेजा जाता है. इसके साथ ही कॉलेज के कुछ कमरों में बाहरी मौलवियों को बुलाकर इस्लाम धर्म कबूल करने व जेहादी किताबें पढ़ाने की बात कही गई है. आरोप है कि हिंदू छात्र-छात्राओं को लालच और प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, और इस कथित संगठन में कुछ चिकित्सक और अधिकारी भी शामिल हैं.
इसके साथ ही जनपद की एलआईयू, आईबी समेत अन्य गोपनीय एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें निष्क्रिय बताया गया है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने संज्ञान लेते हुए गोपनीय जांच बैठा दी है. वहीं इस पूरे मामले में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि मैं पिछले 7 सालों से कार्यरत हूँ लेकिन इस तरह की कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है. बात करें अगर कैम्पस की तो पूरा परिसर CCTV से लैस है और अगर कोई भी कैम्पस में दाखिल होता है तो उसकी पूरी गहनता से जाँच कराई जाती है. उसके बाद ही उसे अंदर प्रवेश मिलता है और जहाँ तक कैम्पस में मौलाना आने की बात की तो यदि किसी छात्र के अभिभावक हो और वो मिलने आए हों तो मैं नहीं कह सकता लेकिन किसी को भी कैम्पस में रहने की इजाजत नहीं है.
फिलहाल मेडिकल कॉलेजों में जिस तरह से धर्मांतरण का खेल सामने आया है, इसकी गम्भीरता को देखते हुए सीएम योगी ने जांच यूपी STF को दे दी है. प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेज अभी इस धर्मांतरण के खेल में लिप्त पाए गए है, जिसमें डॉक्टरों को बहला फुसला कर उनका ब्रेनवॉश कर करने की कोशिश की जा रही थी, अब देखना है पूरे प्रकरण में और किन लोगों के नाम सामने आते है, इस खेल में शामिल मौलानाओं तक पुलिस कब तक पहुंचती है और प्रकरण का खुलासा हो पाता है.
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