यूपी चुनाव 2027: प्रियंका गांधी संभालेंगी जिम्मेदारी? कांग्रेस मुख्यालय से आई इन तस्वीरों ने दिए संकेत
UP Politics: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अभी से तैयारी कर रही है. पार्टी ने हाल ही में वर्ष 2026 का पंचायत चुनाव अकेले लड़ने का निर्णय लिया था.

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है. बीते दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में यह फैसला हो चुका है कि पार्टी, वर्ष 2026 में प्रस्तावित पंचायत चुनाव अकेले लड़ेगी.
अब 11 दिसंबर, गुरुवार को पार्टी की एक और बैठक हुई. इस बैठक में केरल स्थित वायनाड से सांसद और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस की यूपी इकाई के अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडेय मौजूद थे.
इस बैठक से यह संकेत मिल रहे हैं कि वर्ष 2027 के चुनाव में पार्टी एक बार फिर प्रियंका की अगुवाई में चुनावी मैदान में उतर सकती है. वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बुरे प्रदर्शन के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बतौर प्रभारी इस्तीफा दे दिया था.
सोशल मीडिया साइट एक्स पर कांग्रेस के अधिकृत अकाउंट से चार तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा गया- कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की समीक्षा बैठक कर आगामी रणनीतियों पर चर्चा की. इस बैठक में कांग्रेस महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और विधानसभा में कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा मोना के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
जानकारों की मानें तो इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पंचायत चुनाव में पार्टी किस आधार पर प्रत्याशियों का चयन करेगी. पंचायत चुनाव में कांग्रेस की रणनीति है कि वह जिन उम्मीदवारों को टिकट देगी अगर वह बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए उनकी दावेदारी पक्की हो सकती है. इसके साथ ही बैठक में यूपी कांग्रेस के संगठन और ज्यादा मजबूत करने के साथ ही आगे के कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई जिसके जरिए कांग्रेस, लोकसभा चुनाव 2024 में बने मोमेंटम को जनता में बरकरार रख सके.
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में सारा दार-ओ-मदार प्रियंका गांधी पर था. हालांकि पार्टी ने इस चुनाव में अपने इतिहास में सबसे खराब प्रदर्शन किया था और सिर्फ 2 सीटें आईं थीं.
हालांकि वर्ष 2027 के चुनाव को लेकर अभी तक यह स्पष्ट है कि यूपी में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के साथ भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ेगी. हाल ही में एक साक्षात्कार में सपा चीफ और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वर्ष 2027 के चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ ही चुनाव लड़ेगी.
403 सीटों पर तैयारी कर रही कांग्रेस!
उधर, कांग्रेस चीफ अजय राय कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि पार्टी सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है.
जानकारों की मानें तो यूपी कांग्रेस चीफ की इस रणनीति का सीधा मकसद यह है कि भले ही सपा के साथ अलायंस हो लेकिन सीटों के बंटवारे में पार्टी एक हद तक अपनी बात मनवाने में सफल हो सके.
वर्ष 2024 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भी अजय राय कई मौकों पर यह कहते रहे कि पार्टी की तैयारी सभी 80 सीटों पर है. बाद में सपा और कांग्रेस के बीच क्रमशः 62 और 17 सीटों पर समझौता हुआ.
प्रियंका संभालती हैं जिम्मेदारी तो क्या होगा?
सूत्रों का कहना है कि यूपी में अगर प्रियंका फिर से चुनाव के संदर्भ में जिम्मेदारी संभालती हैं तो यह तय है सपा के साथ सीट शेयरिंग में ज्यादा तकरार नहीं होगी. लोकसभा चुनाव के दौरान जब कुछ सीटों पर पेच फंसा तो कांग्रेस की ओर से प्रियंका ने ही कमान संभाली थी.
दावा किया जाता है कि लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर कांग्रेस और सपा के बीच बात फंसी थी जिसकी वजह से गठबंधन के स्वरूप पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका था. जिसके बाद प्रियंका ने खुद इस मामले में पहल की और राहुल से वार्ता के बाद अखिलेश से इस पर चर्चा की थी.
इस दावे को यह बात लगभग पुष्ट करती है कि जब वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा चीफ करहल सीट से चुनाव लड़ रहे थे तब प्रियंका की अगुवाई में कांग्रेस ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा था.
यह तो भविष्य के गर्भ में है कि वर्ष 2027 के चुनाव में कांग्रेस कितनी सीटों पर दावा करती है और वह कितनों पर चुनाव पर लड़ती है लेकिन बीते कुछ दिनों कांग्रेस हाईकमान द्वारा यूपी पर की जा रहीं बैठकों ने यह संकेत निश्चित दे दिए हैं कि पार्टी, वर्ष 2026 में पंचायत और वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव में हुए सियासी लाभ का क्रम बनाए रखना चाहेगी.
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Source: IOCL


























