गोरखपुर में UGC के नए नियमों के खिलाफ DDU के छात्रों का प्रदर्शन, सरकार को खून से लिखा पत्र
UGC New Rules: गोरखपुर में UGC के नए नियमों के विरोध में छात्र मुखर हो गए. छात्रों ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट पर नारेबाजी की. सरकार को खून से पत्र लिखकर नए नियमों को वापस लेने की मांग की.

गोरखपुर में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में छात्र मुखर हो गए. उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट पर एकत्र होकर नारेबाजी की. इस दौरान उन्होंने खून से सरकार को पत्र लिखकर इसे वापस लेने की मांग भी की. इस दौरान उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को सवर्ण छात्रों के खिलाफ साजिश बताया है.
दरअसल, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने मंगलवार 27 जनवरी को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जुटकर विरोध-प्रदर्शन किया. इस दौरान मौके पर पहुंचे वाला अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने छात्रों को समझने का प्रयास किया लेकिन छात्र लगातार धरना प्रदर्शन करते रहे.
सरकार से यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग
विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर 1 घंटे तक छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा. इस दौरान उन्होंने खून से पत्र लिखकर सरकार से इसे वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो इससे भी बड़ा आंदोलन करने को वे लोग बाध्य होंगे.
प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने क्या कहा?
इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्र अंकित पांडेय ने कहा कि यूजीसी ने पहले ही मान लिया है कि सामान्य वर्ग के जो भी विद्यार्थी या शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले लोग हैं, उनके ऊपर जो भी आरोप लगाए जाते हैं, वह भले फर्जी हो उन्हें दोषी मान लिया जाएगा. यह संविधान के अनुच्छेद 14 का सरासर उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि यह हमारे मौलिक अधिकारों का हनन है. यह 13 जनवरी को लागू हुआ, इसके दुष्परिणाम भी हैं. यह पूरी तरह से साजिश है, जिसे वे लोग चलने नहीं देंगे.
'सवर्ण छात्रों के साथ तानाशाही रवैया अपना रही यूजीसी'
गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र श्री ओम त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी सवर्ण छात्रों के साथ तानाशाही रवैया अपना रही है. उन्होंने कहा कि क्या यूजीसी और सरकार चाहती है कि वे लोग अपना कॉपी किताब लाकर यहीं पर फूंक दें? सवर्ण छात्रों के शिक्षा के अधिकार को छीनने का ये प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि गांव से शहर के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. यही वजह है उन्होंने खून से पत्र लिखकर सरकार से इस एक्ट को वापस लेने की मांग की है.
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Source: IOCL


























