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Sishamau By Election 2024: सपा का गढ़ या बीजेपी की नई रणनीति, जातीय समीकरणों के खेल में कौन मारेगा बाजी?

Sishamau By Election 2024: उत्तर प्रदेश के जिन 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, उनमें से सीसामऊ का शुमार हाट सीटों में होता है. यह सीट सपा विधायक को एक मामले में सजा होने के बाद खाली हो गई है.

Sishamau Bypoll Election 2024: उत्तर प्रदेश 9 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होगा. इनमें से कानपुर की बहुचर्चित सीट सीसामऊ सीट भी शामिल है. यह सीट सपा विधायक इरफान सोलंकी को सजा होने के बाद खाली हुई है. इस सीट का शुमार प्रदेश की हॉट सीटों में होता है, यही वजह है कि सबकी नजर सीसामऊ सीट पर बनी है. 

सीसामऊ विधानसभा सीट को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. साल 2012 से इस सीट पर सपा का कब्जा है. प्रदेश के अन्य सीटों की तरह यहां भी जातीय समीकरण काफी मायने रखते हैं. मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित फैक्टर प्रत्याशियों के हार-जीत में बड़ी भूमिक अदा करते हैं. इनमें से एक भी समुदाय का वोटर अगर भटकता हैं तो सियासी समीकरण ध्वस्त हो जाते हैं. 

सपा को सोलंकी परिवार पर भरोसा
कानपुर की सीसामऊ सीट पर मुस्लिम वोटर्स हार जीत में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा ब्राह्मण और दलित फैक्टर काफी महत्वपूर्ण है, जो किसी भी सियासी दल की किस्मत का फैसला करने में अहम भूमिका अदा करता है. इसी सीट पर समाजावादी पार्टी ने सोलंकी परिवार पर एक बार फिर भरोसा जताया है.

समाजवादी पार्टी ने वर्तमान विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को मैदान में उतारा है. सपा ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए सोलंकी परिवार को फिर कमान सौंपी है. इसकी दूसरी वजह यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने यहां से ब्राह्मण चेहरों पर दांव आजमाया है.

सीसामऊ में जातिगत समीकरण
इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 40 फीसदी है, जो किसी की हार-जीत में एकतरफा भूमिका अदा करता है. सीसामऊ में जो भी सियासी दल मुस्लिम मतदाताओं को साधने में सफल रहें हैं, उनकी जीत पक्की मानी जाती है. 
 
इस सीट पर एक समीकरण दलित और ब्राह्मण मतदाताओं का भी है जो एकजुट होकर जिसे वोट कर दें तो वह प्रत्याशी जीता हुआ माना जाता है. बीजेपी ने इस सीट पर दो बार शिकस्त खा चुके सुरेश अवस्थी को मैदान में उतरा है, उनका ताल्लुक ब्राह्मण समाज से है. दूसरी तरफ दलित मतदाताओं को रिझाने के लिए उनकी बस्तियों में बीजेपी पदाधिकारी डेरा जमाए हुए हैं.

सीसामऊ में बीएसपी ने मजबूत प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. बीएसपी दलित मतदाताओं को अपना कोर वोटर मानती रही है, ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए वीरेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है. यहां से दो ब्राह्मण उम्मीदवार होने से हार-जीत का ग्राफ बिगड़ सकता है. कहा जा रहा है इससे ऊपरी तबके का वोट दो हिस्सों में बंट जाएगा. 

इसलिए भारतीय जनता पार्टी दलित मतदाताओं को साधने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है. इसके उलट बहुजन समाज पार्टी के लिए दलित वोट बैंक को अपनी तरफ खींचना ज्यादा आसान माना जा रहा है. बीएसपी प्रत्याशी की ब्राह्मण वोट बैंक पर मजबूत पकड़ मानी जाती है. 

सपा-बीजेपी में मुख्य मुकाबला?
सीसामऊ में मुख्य लड़ाई समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच मानी जा रही है, लेकिन बीएसपी के एंट्री और प्रत्याशी का चयन से सपा बीजेपी के खेल को बिगाड़ सकती है. सोलंकी परिवार की मुस्लिम वोट बैंक के साथ सपा को कोर वोटर पर मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसमें दलित और ब्राह्मण दोनों हैं.

सपा को कांग्रेस के साथ गठबंधन का भी फायदा मिलेगा. इस सीट पर साल 2002 से 2012 तक कांग्रेस के संजीव दरियाबादी विधायक रहे हैं. संजीव दरियाबादी की दलित वोटर्स में अच्छी पैठ है. ऐसे में संजीव दरियाबादी भी सपा प्रत्याशी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे.

बीएसपी ने बढ़ाई मुश्किलें
बीजेपी के ब्राह्मण प्रत्याशी सुरेश अवस्थी की मुश्किलें कुछ हततक बढ़ सकती है. सपा और बीएसपी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बीजेपी प्रत्याशी और उसके पदाधिकारियों को अधिक मेहनत करनी पड़ेगी और उन्हें नए सिरे से योजना तैयार करनी होगी. बीएसपी वीरेंद्र शुक्ला बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं.

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