सपा ने बदली रणनीति, नए साथियों को गठबंधन में ला रहे अखिलेश यादव! जल्द होगा प्रत्याशियों का ऐलान
समाजवादी पार्टी के भीतर यह भी चर्चा हो रही है कि ओवैसी की AIMIM और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी को लेकर रणनीति बनाई जाए. इन पार्टियों पर PDA वोटों में सेंध लगाने का आरोप लगता रहा है.

UP Politics: मिल्कीपुर उपचुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदल ली है. पार्टी ने अभी से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि सपा इस बार पहले से ज्यादा मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगले छह महीने के भीतर कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया जाएगा.
सपा इस बार बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है. उपचुनाव में पार्टी को बूथ मैनेजमेंट की कमी का नुकसान हुआ था. अब सपा ने तय किया है कि हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की जाएगी. बूथ स्तर के पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे वोटर लिस्ट पर नजर रखें. अगर किसी का नाम काटा या जोड़ा जा रहा है, तो उसकी जानकारी रखें ताकि कोई गड़बड़ी न हो.
PDA समीकरण को साधने की तैयारी
सपा इस बार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों (PDA) को साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके लिए पार्टी उन सेवानिवृत्त अफसरों की मदद लेगी, जिनका अपने क्षेत्र में अच्छा नेटवर्क है. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि ऐसे पूर्व अधिकारी सपा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. हाल ही में अखिलेश यादव ने पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी से मुलाकात कर इस पर चर्चा भी की थी.
सपा के भीतर यह भी चर्चा हो रही है कि ओवैसी की AIMIM और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी को लेकर रणनीति बनाई जाए. इन पार्टियों पर PDA वोटों में सेंध लगाने का आरोप लगता रहा है. सपा इस बार इस चुनौती से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर काम करेगी.
लोकसभा सत्र के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद जिलों में जाकर तैयारियों की समीक्षा करेंगे. वे कार्यकर्ताओं और नेताओं को बताएंगे कि किन मुद्दों पर फोकस करना है और भाजपा की “नफरत की राजनीति” के खिलाफ कैसे माहौल बनाना है.
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जल्द होगा प्रत्याशियों का ऐलान
सपा इस बार पहले से ही प्रत्याशियों की घोषणा करने जा रही है. माना जा रहा है कि चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले ही उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया जाएगा ताकि उन्हें अपने क्षेत्र में काम करने का पूरा मौका मिल सके. जिलाध्यक्ष और प्रत्याशी को ही बूथ स्तर पर टीम तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी.
पार्टी इस बार चुनावी मुद्दों को तय करने के लिए जनता से सुझाव भी मांगेगी. इसके लिए सोशल मीडिया कैंपेन चलाया जाएगा, जिसमें लोगों की परेशानियों को समझकर उन्हें चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाएगा. सपा इस बार किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती और पूरी आक्रामकता के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.
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