Ram Mandir Opening: कैसे दिखते थे भगवान श्री राम? गीता प्रेस का दावा- 'ऋषि मुनियों ने उन्हें देखा, वेदों-ग्रंथों में मिलता है वर्णन'
Ramlala Pran Pratishtha: गोरखपुर के गीता प्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल इस बात को सिरे से खारिज करते हैं कि भगवान श्रीराम को किसी ने नहीं देखा है.

Ram Mandir Inauguration: अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा उद्घाटन के पहले इसे लेकर सियासत भी गरमा गई है. कोई भगवान श्रीराम में आस्था प्रकट कर रहा है. तो कोई उनके अस्तित्व को ही नकार रहा है. ऐसे में उनके स्वरूप और चित्रों को लेकर भी चर्चा भी हो रही है. क्योंकि उन्हें किसी ने देखा नहीं है. हम आपको बताते हैं कि गीता प्रेस उनके स्वरूप को चित्रों में कैसे उतारता है.
भगवान श्रीराम सहित किसी भी देवी-देवताओं के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है. विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस भी जिन चित्रों को प्रकाशित करता है, उन्हें ग्रंथों और शास्त्रों में वर्णन के आधार पर उनके स्वरूप को चित्रित किया जाता है. ऋषि-मुनियों ने भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं को भी देखा है. गीता प्रेस भी उन्हीं ग्रथों और शास्त्रों में उनके स्वरूप, वस्त्र और आभूषण के आधार पर भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं के चित्र तैयार करता है.
भगवान राम के रूप को लेकर दावा
गोरखपुर के गीता प्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल इस बात को सिरे से खारिज करते हैं कि भगवान श्रीराम को किसी ने नहीं देखा है. वे कहते हैं कि भगवान श्रीराम को ऋषि-मुनियों ने देखा है. इसका वर्णन भी वेद-शास्त्रों में मिलता है. ग्रन्थों में वर्णन के आधार पर ही हम उनके चित्र प्रकाशित करते हैं. हमें उनके स्वरूप, वस्त्रों और हर देवी-देवता के आभूषणों का वर्णन मिलता है.
ग्रंथों में भगवान के स्वरुपों का वर्णन
गोरखपुर गीता प्रेस के प्रबंधक डा. लाल मणि तिवारी ने बताया कि गीता प्रेस बरसों से इन देवी-देवताओं के चित्रों को प्रकाशित करता चला आ रहा है. गीता प्रेस के संस्थापक जय दयाल गोयन्दका और भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने भी इसके लिए गहन अध्ययन किए हैं. भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारना पूरी तरह से गलत है. वेद-शास्त्रों और ग्रंथों में इसका जिक्र मिलता है. हमारे ऋषि-मुनियों ने भी उन्हें देखा है. ऐसे में उनके शारीरिक बनावट, वस्त्र और आभूषण के बारे में वर्णन भी ग्रन्थों में मिलता है.
उन्होंने कहा कि, इसी के आधार पर गीता प्रेस भी उनके स्वरूप की कल्पना कर उनके चित्र बनाते हैं. यहां भगवान श्रीराम के अलावा अनेक देवी-देवताओं के चित्रों की गहन अध्ययन के बाद उनके स्वरूप को कल्पना से चित्रों में उकेरा जाता है. गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाले देवी-देवताओं के चित्रों का यही आधार है.
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