मथुरा के झंडे बढ़ाएंगे राजनीतिक डंडे की शान, जानिए क्या है कनेक्शन
जिन झंडों को लेकर कार्यकर्ता अपने कंधे पर लेकर चलते हैं, वो झंडे कृष्ण नगरी मथुरा में बन रहे हैं। देश में चुनावी माहौल है तो ऐसे में मथुरा में झंडों की छपाई का काम दिन-रात चल रहा है।

मथुरा, एबीपी गंगा। मथुरा वैसे तो भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि के नाम से जानी जाती है, लेकिन जब बात चुनाव की आती है तो यहां के झंडे का जिक्र भी जरूरी हो जाता है। माहौल चुनाव का हो और पार्टी के झंडों का जिक्र ना हो... भला ऐसा कैसे हो सकता है। जिन झंडों को लेकर कार्यकर्ता अपने कंधे पर लेकर चलते हैं, वो झंडे कृष्ण नगरी मथुरा में बन रहे हैं। देश में चुनावी माहौल है तो ऐसे में मथुरा में झंडों की छपाई का काम दिन-रात चल रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दलों के झंडे मथुरा में ही बन रहे हैं। इनकी संख्या 10 करोड़ तक हो सकती है, जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में यह संख्या 6 करोड़ के आस-पास थी।
सबसे ज्यादा भाजपा के झंडों का ऑर्डर मथुरा में पिछले काफी समय से भाजपा की तरफ से सबसे ज्यादा झंडों की छपाई के ऑर्डर मिल रहे हैं। जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस के झंडे छापे जा रहे हैं। वहीं, क्षेत्रीय दलों के झंडों की संख्या सबसे कम है। बीते विधानसभा चुनाव में भी झंडे छपाई का यही औसत रहा था। सालों से मथुरा झंडों की छपाई का केंद्र बना हुआ है। 
साड़ी प्रिंटिंग से ज्यादा झंडे की छपाई मथुरा में पहले साड़ी प्रिटिंग का काम ज्यादा होता था। ऐसा समय भी था जब मथुरा में सबसे ज्यादा साड़ियों की प्रिंटिंग का काम होता था। हालांकि, पिछले कुछ समय से साड़ी छपाई का काम मंदा पड़ा है। झंडे की छपाई से मंदे पड़े साड़ी उद्योग की भरपाई की जा रही है। बतादें कि मथुरा में अन्य शहरों के मुकाबले झंडे की छपाई का रेट कम है साथ ही यहां लेबर भी सस्ती पड़ती है। यही वजह है कि सभी दलों को झंडा छपाई के लिए कृष्णनगरी ही रास आती है। औद्योगिक क्षेत्र समेत सरस्वती कुंड व मसानी बाईपास स्थित आधा दर्जन से ज्यादा छपाई कारखाने इन दिनों झंडे छापने का काम कर रहे हैं।
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL
























