राम मंदिर का दरवाजा किधर है...? अखिलेश यादव के आरोपों पर ओम प्रकाश राजभर ने पूछा सवाल
UP News: यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें तो ये तक नहीं पता कि राम मंदिर का द्वार कहां है?

उत्तर प्रदेश में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद सियासत गर्म हो गई है. यूपी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ये सब झूठ बोलने वाले लोग है. उनके पास कौन सा सबूत आ गया कि मंदिर में रुपये की चोरी हो गई है.
ओम प्रकाश राजभर ने किया पलटवार
कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा- "कभी गए हैं कि अयोध्या राम मंदिर का दरवाजा किधर है, वो देखे हैं? उनके पास कौन सबूत आ गया कि रुपये की चोरी हो गई. अखिलेश जी के विषय में हम इतना जानते हैं कि खाता न बही, जो न अखिलेश जी कहें वो है सही."
राजभर ने कहा कि "सरकार को पता नहीं, खुफिया तंत्र को पता नहीं और इनको जरूर पता हो गया. तो ये सब झूठ बोलने वाले लोग हैं, गुमराह करने वाले लोग हैं, और कुछ है नहीं."
राम मंदिर के चढ़ावे पर ट्रस्ट ने दी सफाई
वहीं दूसरी तरफ इस पूरे विवाद पर श्री राम जन्म भूमि ट्रस्ट के सचिव चंपत राय की ओर से भी बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के विभिन्न कार्यक्रमों का समय-समय पर ऑडिट होता रहा है. ये कार्य तीर्थ क्षेत्र के सदस्य और तमाम कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी करते हैं. ये काम कई दिनों तक चलता है लेकिन अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है.
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अखिलेश यादव ने लगाए गंभीर आरोप
बता दें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम ग़ायब होने के आरोप लगाए थे और इस पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने इस मामले का कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेकर जाँच करने की मांग की है. जिसके इस मुद्दे को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है.
सपा मुखिया ने इस मामले में ट्रस्ट की ओर से आए स्पष्टीकरण को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि ये भी साफ़ किया जाए कि 40 सेकंड का स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे और स्पष्टीकरण के नाम पर 1 मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है? प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ये सफ़ाई भी संदिग्ध है? ऐसा लग रहा है जैसे स्पष्टीकरण के नाम पर शाब्दिक औपचारिकता निभाई जा रही है.























