मसूरी के 49 होटलों पर NGT सख्त, 6 सप्ताह में मांगी विस्तृत रिपोर्ट; 21 सितंबर को अगली सुनवाई
Uttrakhand News in Hindi: मसूरी के 49 होटलों में पर्यावरणीय मानकों के कथित उल्लंघन के मामले में NGT ने UKPCB से छह सप्ताह में रिपोर्ट मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर को होगी.

मसूरी के 49 होटलों में पर्यावरणीय मानकों के कथित उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है. एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. यह आदेश 7 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया. मामले की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर 2026 को होगी.
यह मामला कार्तिक शर्मा की ओर से दायर मूल याचिका पर सुना गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मसूरी के कई होटल आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और मानकों का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं. सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया, लेकिन अधिकरण ने इसे पर्याप्त नहीं माना और प्रत्येक होटल की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा.
एकतरफा प्यार में डेढ़ साल के मासूम को पटककर मारने वाले दरिंदे को फांसी, महज 40 दिन में आया फैसला
हर होटल की वर्तमान स्थिति बतानी होगी
एनजीटी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर होटलवार रिपोर्ट दाखिल करे. रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित होटल के पास वैध कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) है या नहीं, पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन किस स्थिति में है, किस होटल पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई है, कितनी राशि वसूल हुई है और किन मामलों में कार्रवाई अभी लंबित है.
अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नोटिस जारी करने या कार्रवाई प्रक्रिया में होने की जानकारी पर्याप्त नहीं होगी. प्रत्येक मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति और वास्तविक अनुपालन का विवरण देना होगा.
19 होटलों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय
सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि 49 में से 19 होटलों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित की जा चुकी है. इनमें कुछ प्रतिष्ठानों ने निर्धारित राशि जमा कर दी है, जबकि कुछ होटल संचालकों ने संबंधित आदेशों को न्यायालय में चुनौती दी है. कुछ मामलों में क्षतिपूर्ति की वसूली अब भी लंबित है. एनजीटी ने बोर्ड से कहा है कि अगली रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाए कि कितनी राशि वास्तव में वसूल की गई और कितने मामलों में वसूली बाकी है.
बाकी 30 होटलों के मामलों पर भी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बाकी 30 होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे. इनमें से 12 होटलों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि शेष 18 मामलों में अंतिम कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है. बोर्ड ने अधिकरण को बताया कि इन मामलों में अगले चार सप्ताह के भीतर अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे. हालांकि एनजीटी ने कहा कि अगली सुनवाई तक इन सभी मामलों की अपडेटेड स्थिति रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए.
पर्यावरणीय अनुमति पर NGT की सख्त टिप्पणी
अधिकरण ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि किसी होटल के पास वैध संचालन अनुमति नहीं है तो वह अब तक कैसे संचालित होता रहा. पीठ ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह सुनिश्चित करे कि बिना आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति के कोई भी होटल संचालन न करे. खास तौर पर कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की स्थिति, सीवेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निस्तारण और अन्य पर्यावरणीय मानकों के पालन की जानकारी रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.
पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
मसूरी उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में होटल उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी शहरों में अनियंत्रित निर्माण, सीवेज प्रबंधन में लापरवाही और ठोस कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण न होने से पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए एनजीटी का यह आदेश केवल 49 होटलों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पर्वतीय पर्यटन क्षेत्र में पर्यावरणीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छह सप्ताह के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी. उस दिन बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर अधिकरण आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा. इस मामले पर अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निर्धारित समयसीमा में कितनी विस्तृत और तथ्यपरक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है तथा जिन होटलों पर नियम उल्लंघन के आरोप हैं, उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है.
Exclusive: हनुमानगढ़ी में सच में नमाज हुई थी? बृजलाल के दावे पर पूर्व IPS वीएन राय बोले- सरासर झूठ
























