महोबा: बेटी की शादी से 11 दिन पहले कर्ज से दबे किसान ने लगाई फांसी, परिवार ने सरकार से मांगी मदद
Mahoba News: महोबा में किसान कृष्णपाल ने बेटी की शादी से 11 दिन पहले फांसी लगाई. कर्ज का बोझ और फसल बर्बाद. दो बीघा जमीन, शादी का इंतजाम नहीं. 24 फरवरी को शादी थी.

उत्तर प्रदेश के महोबा में खुशियों वाले घर में उस वक्त मातम पसर गया जब एक मजबूर पिता ने बेटी की शादी से महज 11 दिन पहले खेत में फांसी लगाकर जान दे दी. कर्ज का बोझ और फसल की बर्बादी ने कृष्णपाल सिंह बुंदेला को इस कदर तोड़ा कि उन्होंने मौत को गले लगा लिया. अब परिवार शासन से मदद की गुहार लगा रहा है.
महोबा के श्रीनगर थाना क्षेत्र के ज्योरैया गांव में पुत्री की शादी की खुशियां मातम में बदल गई हैं. शहनाई की गूंज की जगह चीख-पुकार मची है. घर में 24 फरवरी को तनीशा के हाथ पीले होने थे, रिश्तेदारों को कार्ड बांटे जा चुके थे, लेकिन पिता कृष्णपाल सिंह बुंदेला के मन में एक गहरा डर बैठा था कि बेटी की विदाई का इंतजाम कैसे होगा?
दो बीघा जमीन, फसल बर्बाद और कर्ज का बोझ
50 वर्षीय कृष्णपाल के पास महज दो बीघा जमीन थी. पिछली फसल पूरी तरह नष्ट हो गई थी और इस बार बटाई पर लिए खेतों में खड़ी चने की फसल भी खराब होने लगी. साहूकारों का पुराना कर्ज सिर पर था और ऊपर से दूसरी बेटी की शादी की जिम्मेदारी. आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव ने इस किसान को अंदर से झकझोर कर रख दिया था.
बेटी की शादी के लिए रुपये का इंतजाम न होने से समाज में क्या मुंह दिखाएगा, यह सोचकर उसने अपनी जान दे दी. मृतक के बड़े भाई इंद्रपाल सिंह बताते हैं कि दो साल पहले बड़ी बेटी सालनी का विवाह जैसे-तैसे किया था, लेकिन इस बार हाथ बिल्कुल खाली थे. कर्ज चुकाने का दबाव और शादी की तैयारियों के बीच उलझे कृष्णपाल ने अपने ही खेत में जाकर पेड़ से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.
पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
पिता की मौत ने पांच बच्चों के सिर से साया छीन लिया है. 19 साल की तनीशा, जिसकी डोली उठनी थी, आज अपने पिता की अर्थी देखकर सुध-बुध खो बैठी है. घर में अब तीन बेटियां और दो छोटे बेटे रह गए हैं. पूरा परिवार सदमे में है और अब उनकी उम्मीदें सिर्फ सरकार पर टिकी हैं. भाई विक्रम सिंह बुंदेला और पूरे गांव ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है ताकि जिस बेटी की शादी के लिए पिता ने जान दी, उसका विवाह संपन्न हो सके और अनाथ हुए बच्चों को सहारा मिल सके.
यह घटना किसानों की बदहाली और कर्ज के बोझ तले दबे मध्यम वर्गीय परिवारों की पीड़ा को दर्शाती है. एक पिता जो अपनी बेटी की शादी का इंतजाम नहीं कर पाया और समाज के डर से अपनी जान दे दी. सरकार को ऐसे परिवारों की मदद के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.
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Source: IOCL

























