महोबा: बीजेपी की तिरंगा यात्रा में 5 घंटे प्यासे रहे बच्चे! व्यवस्था पर उठे सवाल
Mahoba News In Hindi: महोबा में बीजेपी की तिरंगा यात्रा के दौरान भारी अव्यवस्था देखने को मिली. सुबह 7 बजे बुलाए गए स्कूली बच्चे 5 घंटे तक भीषण गर्मी और बिना पानी के इंतजार करते रहे.

उत्तर प्रदेश के महोबा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तिरंगा यात्रा के दौरान भारी अव्यवस्था और बदइंतजामी का आलम देखने को मिला. देशप्रेम और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर निकाली गई इस यात्रा में मासूम स्कूली बच्चों की जमकर फजीहत हुई. भीषण गर्मी और पीने के पानी की किल्लत से परेशान होकर आखिरकार छात्रों का सब्र टूट गया और उन्होंने मौके पर जमकर हंगामा किया.
जानकारी के मुताबिक, महोबा मुख्यालय के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में सुबह 7 बजे से ही कई स्कूलों के छोटे-छोटे बच्चों को यात्रा के लिए बुला लिया गया था. लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद घंटों तक यात्रा शुरू नहीं हो सकी. भीषण धूप, पसीने से लथपथ कर देने वाली उमस और पीने के पानी के अभाव में 5 घंटे तक इंतजार करते-करते मासूम बच्चों का बुरा हाल हो गया. लंबे इंतजार और प्यास से तड़प रहे बच्चों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा और उन्होंने स्कूल परिसर में ही अव्यवस्थाओं के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया.
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दोपहर 12 बजे पहुंचे मंत्री, दी यह सफाई
बच्चों के 5 घंटे के लंबे इंतजार के बाद दोपहर करीब 12 बजे उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मन्नू कोरी मौके पर पहुंचे. उनके पहुंचने के बाद सरस्वती विद्या मंदिर से यात्रा को हरी झंडी दिखाई गई, जो उदल चौक और मुख्य बाजार होते हुए वापस विद्यालय में आकर समाप्त हुई.
जब मीडिया ने मासूम बच्चों को हुई परेशानी और 5 घंटे की देरी पर मंत्री मन्नू कोरी से सवाल किया, तो उन्होंने लापरवाही मानने के बजाय अजीबोगरीब सफाई दी. मंत्री ने कहा कि वे दूसरे स्कूल के बच्चों का इंतजार कर रहे थे ताकि उन्हें भी साथ लिया जा सके. उन्होंने मामले को टालते हुए कहा कि कोई दिक्कत नहीं है, यात्रा का मकसद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महान नायकों को श्रद्धांजलि देना है.
बुंदेलखंड राज्य की मांग पर गोलमोल जवाब
वहीं, बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग पर पूछे गए सवाल को भी मंत्री मन्नू कोरी टाल गए. उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही करेंगे, उनके कहने से कुछ नहीं होगा.
इस पूरे घटनाक्रम ने यह गंभीर सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों की चमक-धमक के बीच मासूम बच्चों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और बुनियादी व्यवस्थाओं (जैसे पानी) की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
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