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फूलपुर की सियासत में दल बदलते रहे बड़े-बड़े सूरमा, जानिए इनका इतिहास

फूलपुर लोकसभा सीट देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की कर्मभूमि रही है। आज हम इसी सीट के बारे में आपको कुछ खास बताने जा रहे हैं।

फूलपुर, एबीपी गंगा। प्रयागराज जिले की राजनीति में चेहरे हमेशा से ही बदलाव दिखाते रहे हैं। यहां से चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशियों ने अलग-अलग दलों का झंडा थामा। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मभूमि फूलपुर सीट इस मामले में अव्वल है। फूलपुर लोकसभा सीट से लगातार तीन बार सांसद रहे रामपूजन पटेल भी अलग-अलग दलों से चुनाव लड़े। रामपूजन 1984 में पहली बार फूलपुर से सांसद बने। हालांकि, इससे पहले 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में भी वो यहां से ताल ठोक चुके थे, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी। इन दोनों चुनावों में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े।

रामपूजन 1989 में फिर चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्होंने कांग्रेस छोड़ जनता दल का दामन थाम लिया था। हालांकि, इस बार भी जनता ने रामपूजन पर ही भरोसा दिखाया और उन्हें जिताया। 1991 में हुए अगले आम चुनाव जनता दल की टिकट पर वो फिर जीत गए। 1996 में उनका जनता दल से मोह भंग हो गया और कांग्रेस में शामिल होकर घर वापसी की। इसी साल उन्होंने चुनाव लड़ा और सीधा चौथे नंबर पर खिसक गए। दो साल बाद 1998 के चुनाव में रामपूजन हाथी पर सवार होकर बसपा की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन बुरी तरह हारे। अगले ही साल उन्होंने फिर कांग्रेस में वापसी की और चुनाव लड़ा, लेकिन वो फिर चुनाव हारे और अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।

बसपा से सपा में गए जंग बहादुर पटेल फूलपुर के सांसद रहे जंग बहादुर पटेल का भी ऐसा ही राजनीतिक इतिहास है। इस सीट से दो बार सांसद रहे जंग बहादुर ने भी दल बदले थे। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से की थी जिसके बाद वो सपा में चले गए। 1996 और 98 में उन्होंने सपा से चुनाव लड़ा और जीते।

रीता बहुगुणा जोशी ने भी बदला दल योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री फिलहाल भाजपा में हैं और पार्टी ने उन्हें उनके पिता हेमवती नंदन बहुगुणा की कर्मभूमि रही इलाहाबाद सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, इससे पहले वो कांग्रेस और सपा में भी रही। कांग्रेस ने उन्हें तीन बार लोकसभा चुनाव भी लड़ाया। जबकि रीता ने सपा की टिकट पर 1998 में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वो भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी से हार गई।

वीपी सिंह भी रहे हैं दल-बदलू देश के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी अलग-अलग दलों का झंडा थाम चुके हैं। 1971 में उन्होंने फूलपुर से कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और पहली बार लोकसभा पहुंचे। वीपी सिंह ने 1980 में इंदिरा कांग्रेस की टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ा और फिर जीते। हालांकि 1988 में हुए उपचुनाव में वो निर्दलीय मैदान में उतरे और फिर जीते। 1989 और 91 में उन्होंने जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़ा और इस बार भी उन्होंने जीत दर्ज की।

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