छह साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार शुरू, पहला दल पहुंचा तकलाकोट
धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी के अनुसार 20 सदस्यीय दल ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में आव्रजन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कीं.

करीब छह साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपूलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार वर्ष 2026 के लिए फिर से शुरू हो गया है. पहले चरण में भारतीय व्यापारियों का पहला दल चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट मंडी पहुंच गया. दोनों देशों की निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सीमा व्यापार का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया. व्यापार शुरू होने से सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में उत्साह का माहौल है.
धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी के अनुसार, भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारियों और चार हेल्परों सहित 20 सदस्यीय दल ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में आव्रजन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी कीं. इसके बाद दल ने नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया और शनिवार सुबह लिपूलेख दर्रे के लिए रवाना हुआ.
चीन ने पंजीकृत व्यापारियों को दी प्रवेश की अनुमति
शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे चीन के अधिकारियों ने लिपूलेख दर्रे पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर भारतीय व्यापारियों को तिब्बत में प्रवेश की अनुमति दी. इसके बाद दल तकलाकोट मंडी पहुंचा, जहां वर्ष 2026 के सीमा व्यापार की औपचारिक शुरुआत हुई.
प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल चीन प्रशासन ने केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश की अनुमति दी है, जो पहले से पंजीकृत हैं और पूर्व में भी सीमा व्यापार कर चुके हैं. इसी वजह से इस बार व्यापारी अपने साथ नया माल लेकर नहीं गए. वे तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने स्टॉक के आधार पर व्यापारिक गतिविधियां संचालित करेंगे.
अगले दलों को भेजने की तैयारी
उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भेजने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ई-मेल के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है. अनुमति मिलते ही अगले दलों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा.
स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने से सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. इससे पारंपरिक व्यापार को मजबूती मिलने के साथ रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
























