हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को मिली रफ्तार, भूमि अधिग्रहण पर शुरू हुई चर्चा
बैठक में रोपवे विशेषज्ञ नितेश कुमार ने बताया कि रोपवे का डिजाइन ट्रैक्टबेल इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है.

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर की यात्रा को सुगम बनाने के लिए गोविंदघाट से हेमकुंड तक रोपवे निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार की पर्वतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित इस 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे के निर्माण के लिए जिला प्रशासन और परियोजना से जुड़ी एजेंसियों के बीच बैठक आयोजित की गई, जिसमें भूमि अधिग्रहण समेत अन्य पहलुओं पर चर्चा हुई.
गुरुवार को जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में यह बैठक जिला मुख्यालय गोपेश्वर में आयोजित की गई. बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के अधिकारियों ने प्रस्तावित रोपवे परियोजना की विस्तृत जानकारी दी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया.
जिलाधिकारी ने इस दौरान निर्माणदायी कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना क्षेत्र में पड़ने वाले सामाजिक और पारिस्थितिक प्रभावों का गहराई से आकलन किया जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाए. उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी की जानी चाहिए.
बैठक में रोपवे विशेषज्ञ नितेश कुमार ने बताया कि रोपवे का डिजाइन ट्रैक्टबेल इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,730.13 करोड़ रुपये है और इसके अंतर्गत छह स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. यह रोपवे एक घंटे में 1,100 तीर्थयात्रियों को गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक पहुंचाने में सक्षम होगा. इससे तीर्थयात्रियों को वर्तमान में लगने वाले समय और कठिन चढ़ाई से निजात मिलेगी.
परियोजना को पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल बनाते हुए सभी सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है. एनएचएलएमएल की ओर से परियोजना की डिजाइन, निर्माण और संचालन सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यह रोपवे तकनीकी दृष्टि से विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त होगा.
गौरतलब है कि वर्तमान में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को 19 किमी की कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें घांघरिया बेस कैंप से हेमकुंड साहिब तक का अंतिम छह किलोमीटर का मार्ग अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाला होता है. इस मार्ग पर अधिक ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी के कारण बुजुर्ग और अस्वस्थ तीर्थयात्रियों को कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
रोपवे के निर्माण से न केवल यात्रा आसान, सुगम और सुरक्षित होगी, बल्कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा. साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. परियोजना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और धार्मिक संगठनों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. यदि सब कुछ नियोजित ढंग से आगे बढ़ा, तो आने वाले वर्षों में हेमकुंड साहिब यात्रा का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा.
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