Gorakhpur News: शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान टाइगर 'केसरी' की मौत, पीलीभीत में 13 लोगों की ली थी जान
UP News: शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान में 6 माह पहले लाए गए बंगाल टाइगर की तीन दिन पहले मौत हो गई. पीलीभीत में उसने 13 लोगों को अपना निवाला बनाया.

Gorakhpur News: यूपी के पीलीभीत से गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान में 6 माह पहले लाए गए बंगाल टाइगर की तीन दिन पहले मौत हो गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसका नामकरण कर उसे 'केसरी' नाम दिया था. भारत के विशालकाय बंगाल टाइगर में शुमार केसरी जंगल से भटककर पीलीभीत के 6 गांव में 6 माह तक दहशत का पर्याय बना रहा. उसने पीलीभीत में 13 लोगों को अपना निवाला बनाया. उसे बेहोश कर पकड़ा गया और गोरखपुर लाया गया.
टाइगर केसरी मेनिनजाइटिस और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से पीड़ित था. जब उसे रेस्क्यू किया गया तो उसमें बहरापन के लक्षण पाए गए थे. अंदेशा है कि पूर्व में दिमाग पर चोट लगने से बहरापन, बीमारी और उसके बाद मौत वजह हो सकते हैं. 280 किलो वजन और विशालकाय शरीर की वजह से उसे चिड़ियाघर के बाड़े में देखने वाले पर्यटकों की भीड़ लगी रहती थी. चिड़ियाघर में एक साल पहले मरियम शेरनी की अधिक उम्र की वजह से मौत हो गई थी. उसकी उम्र 20 वर्ष से अधिक थी. जबकि इनकी औसत उम्र 15 से 17 वर्ष होती हैं.
6 माह पहले रेस्क्यू कर लाया गया था गोरखपुर
गोरखपुर के शहीद अशफ़ाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान में पीलीभीत से छह माह पहले रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाए गए बाघ केसरी की रविवार 30 मार्च को भोर में चार बजे अचानक मौत हो गई. शनिवार से ही उसके व्यवहार में परिवर्तन आ गया था. वह काफी आक्रामक और बेचैन था. शाम को उसका पोस्टमॉर्टम हुआ, तो मौत की वजह उसके दिमाग में पानी भरना बताई गई. जांच के लिए इसका सैंपल आईवीआरआई बरेली भेजा गया. विशेषज्ञों की रिपोर्ट के मुताबिक उसके दिमाग में पानी भरा था. बाघ पहले से ही काफी तनाव में था. इसकी विस्तृत जांच के लिए सैंपल आईवीआरआई, बरेली भी भेजा गया है.
बाघ केसरी 8 साल का था. उसको 27 सितंबर 2024 को पीलीभीत से गोरखपुर लाया गया था. पीलीभीत में उसने करीब 13 इंसानों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था. शुरुआत में इसे शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के अस्पताल में रखा गया. यह चिड़ियाघर का सबसे विशालकाय बाघ था. वजन करीब 280 किलो था.
जंगल से आने की वजह से यह क्वारंटीन सेल में काफी बेचैन रहता था. धीरे-धीरे इसका व्यवहार शांत हुआ तो इसे क्रॉल में भी छोड़ा जाने लगा. इसकी ताकत को देखते हुए ही क्रॉल की ग्रिल को मजबूत किया गया था. 20 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बाड़े में छोड़कर 'केसरी'नाम दिया था. बाड़े में भी इसे जंगल की याद सता रही थी. शुरुआत में यह बाड़े में कम निकलता था. एक बार निकल जाए तो फिर इसे वापस लाने में काफी परेशानी होती थी.
पशु चिकित्सकों की टीम ने किया बाघ का पोस्टमार्टम
रविवार 30 मार्च की भोर में जब उसकी गतिविधि एकदम बंद हो गई, तो कर्मियों ने इसकी सूचना आलाधिकारियों को दी. टीम जब मौके पर पहुंची तो वह दम तोड़ चुका था. इसके बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली और लखनऊ चिड़ियाघर से संपर्क कर टीम बुलाई. दोनों संस्थानों से आई पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघ का पोस्टमॉर्टम किया. रिपोर्ट में बताया गया कि उसके दिमाग में करीब 100 एमएल पानी भरा मिला, जिसे मेनिनजाइटिस बीमारी कहते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ पहले से ही काफी तनाव में था. इस वजह से उसमें दिमाग में पानी भर गया. यह पानी एक दिन में नहीं भरा है. धीरे-धीरे कर पानी काफी गाढ़ा हो गया था. इसकी वजह से उसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर की समस्या भी थी.
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बाघ केसरी की रविवार भोर में मौत हो गई. शनिवार को वह तनाव में था और आक्रामक व्यवहार कर रहा था. उसे जरूरी दवाएं दी गई थी. इसके बाद उसे निगरानी में रखा गया था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके दिमाग में पानी निकला है. विस्तृत जांच के लिए सैंपल बरेली भेजा गया है. अचानक उसके अंदर अत्यधिक उग्रता दिखी और उसने खुद को गंभीर चोटें भी लगा ली थी.
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Source: IOCL





















