Gorakhpur News: जादू दिखाते वक्त आंत में चली गई 20 धारदार ब्लेड की माला, कई डॉक्टरों के लगाये चक्कर, फिर...
गोरखपुर में जादूगरी से दूसरों का मनोरंजन करना एक जादूगर को महंगा पड़ गया. 20 धारदार ब्लेड की माला गले से होते हुए जादूगर की आंत में चली गई.

Gorakhpur Latest News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जादूगरी से दूसरों का मनोरंजन करना महंगा पड़ गया. जादू दिखाते समय 20 धारदार ब्लेड की माला गले से होते हुए जादूगर की आंत में पहुंच गई. वह कई दिन तक एक ही धागे में बंधी ब्लेड को लेकर घूमता रहा. इस दौरान वो सिर्फ लिक्विड डाइट के सहारे रहा. कई डाक्टरों के यहां चक्कर लगाने के बाद वो गोरखपुर पहुंचा और आखिरकार गोरखपुर के डॉ. विवेक मिश्रा और उनकी टीम ने बगैर काटे और टांका लगाए इंडोस्कोपी के जरिए ब्लेड को मुंह के रास्ते से निकाल दिया. इस दौरान आंत में कई जगह पर घाव भी हो गए. जिसे भरने में कुछ वक्त लग सकता है.
यहां जानें पूरा मामला
सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थानाक्षेत्र के दुल्हा खुर्द के रहने वाले सिब्बन लाल वर्मा का 20 साल का पुत्र निलेश वर्मा जागदूर है. वो 8 दिन पहले लोगों को हैरतअंगेज करतब दिख रहा था. वह 20 धारदार ब्लेड की माला बनाकर करतब दिखा रहा था. जैसे ही उसने ब्लेड के बंडल को मुंह में रखकर धागे के सहारे उसे बाहर निकालने की कोशिश की, चूकवश माला में पिरोई गई ब्लेड उसके गले से होते हुए पेट में चली गई.
ब्लेड की माला आंत में लेकर वो कई दिनों तक इधर-उधर भटकता रहा. जब उसे दर्द का एहसास हुआ, तो वो गोरखपुर के मेडिकल रोड स्थित सिटी हास्पिटल पर गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा के पास पहुंचा.
सिटी हास्पिटल पर गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने सर्जरी टीम में किशन और प्रिंस की मदद के साथ आपरेशन करने का फैसला लिया. 24 अप्रैल को वो सिटी हॉस्पिटल में डॉ. विवेक मिश्रा के पास पहुंचा.
25 को उसे भर्ती कर उसका ऑपरेशन किया गया. उन्होंने उसकी पैथालॉजी और रेडियोलॉजी जांच कराई. इसके बाद इंडोस्कोपी के जरिए ऑपरेशन करने का फैसला लिया. इस ऑपरेशन में कोई टांका और चीरा नहीं लगाया गया. माइक्रोकैमरे और क्लच की मदद से ब्लेड की माला को डॉक्टर ने निकाल दिया. हालांकि ब्लेड की नुकीली धार से आंत में कई जगह घाव हो गए. उसका उपचार चल रहा है.
गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डा. विवेक मिश्रा ने बताया कि इस आपरेशन में काफी खतरा रहा है. आंतों में चोट आने का डर भी रहा है. इस ऑपरेशन में ब्लेड से आंत फट भी सकती थी. इसे कम करने के लिए इंडोस्कोपी कैमरे के साथ रबर की थैली को जोड़ा गया.
इसके साथ ही क्रिस्पिंग नेट और फॉरेन बॉडी रिमूवर का उपयोग किया गया. ऑपरेशन करीब एक घंटे चला. इसमें मरीज को बेहोश कर मुंह के रास्ते ब्लेड की माला को बाहर निकाल दिया गया.
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Source: IOCL






















