प्रयागराज में बाढ़ का कहर जारी, दो दर्जन से ज्यादा इलाकों में मकानों की पहली मंजिल तक डूबी
प्रयागराज में बाढ़ का कहर जारी है। हालांकि बीते एक दिन से बारिश न होने के चलते कुछ राहत है लेकिन कई इलाके अभी भी जलजमाव का संकट झेल रहे हैं। यहां बिजली,पीने का पानी का संकट बरकरार है

प्रयागराज, मोहम्मद मोइन। संगम नगरी प्रयागराज में बाढ़ का कहर फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां गंगा और यमुना दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे तो आ गईं हैं, लेकिन तमाम इलाकों में अब भी बाढ़ का पानी संकट बना हुआ है। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश की वजह से दोनों नदियों का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। प्रयागराज में तमाम सड़कें और रास्ते अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। शहर की दो दर्जन से ज़्यादा बस्तियों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। हजारों मकानों की पहली मंज़िल बाढ़ में डूबी हुई है। यह पहला मौका है जब अक्टूबर के महीने में भी बाढ़ यहां के लोगों को परेशान कर रही है। बाढ़ की वजह से सभी कोचिंग संस्थान अब तीन अक्टूबर तक बंद रखे जाने के आदेश जारी किये गए हैं।
सबसे ज़्यादा दिक्कत देश के कोने कोने से संगम आने वाले श्रद्धालुओं को हो रही है। संगम जाने वाले सभी रास्ते और घाट अब भी बाढ़ के पानी में समाए हुए हैं। गंगा आरती-कर्मकांड और संगम स्नान रिहाइशी बस्तियों में हो रहा है। वैसे यहां पिछले दो दिनों में तेज़ बारिश नहीं हुई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि रात से जलस्तर तेजी से घटने लगेगा। बिहार में आई ज़बरदस्त बाढ़ की खबर यहां के लोगों को और परेशान कर रही है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ राहत शिविरों में फिर से चहल पहल बढ़ गई है। जिन इलाकों में बाढ़ का पानी घटा है, वहां अब संक्रामक बीमारियां पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए तमाम कदम उठाए जाने के दावे किये हैं, लेकिन पहले के मुकाबले सरकारी अमला अब सुस्त नज़र आने लगा है। बाढ़ और बारिश में राहत पाने की उम्मीद पालने वालों के लिए चार नए टेलीफोन नम्बर्स जारी किये गए हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में फिलहाल बिजली और पीने के पानी की समस्या पैदा हो रही है। बाढ़ से यहां के लोग अब परेशान हो उठे हैं। प्रयागराज में गंगा और यमुना में आई बाढ़ पिछले डेढ़ महीने से डेरा डाले हुए हैं, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।






















