Exclusive: 'शंकराचार्य भी PDA हैं... पीड़ित, दुखी, अपमानित' कानपुर से अखिलेश यादव का बड़ा सियासी संदेश!
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को भी PDA बताया. एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोपों के बीच उन्हें अपने सियासी फॉर्मूले में सेट करने की कोशिश की है. उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर में एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए कन्नौज सांसद ने शंकराचार्य को पीडीए बताया है.
उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान का जिक्र करते हुए अखिलेश ने राज्य सरकार को भी घेरा है. अखिलेश ने पूछा कि शंकराचार्य का अपमान कैसे हो रहा है? हमारे धर्म के सबसे बड़े वह शंकराचार्य हैं. उनका जब अपमान हुआ तो डिप्टी सीएम कहते हैं महापाप पड़ेगा और जो देख रहे थे शंकराचार्य को और अपमान होते हुए देख रहे थे क्या उन पे महापाप नहीं पड़ेगा?
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर इनको दुख है और उनको दुख था तो मैं तो एक ही सुझाव दे सकता हूं जापान से आने में बड़ा वक्त लगेगा इस्तीफा दो 100 विधायकों का ऑफर समाजवादियों की तरफ से नया मुख्यमंत्री बनाओ नए तरीके से काम करो. चुनावी वर्ष में ब्राह्मण कार्ड के सवाल पर सपा मुखिया ने कहा कि पीडीए कार्ड देखिए शंकराचार्य पीड़ित हैं, दुखी हैं, अपमानित हैं. अब बताओ हम लोग उनके साथ खड़े हैं कि नहीं खड़े हैं.
जानकारों की मानें तो अखिलेश इस बयान के जरिए राज्य में बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है. अक्सर यह सवाल उठते हैं कि सपा के पीडीए में ब्राह्मण और हिन्दू नहीं हैं. अब इस बयान के माध्यम से अखिलेश, बीजेपी की हिन्दुत्व की राजनीति को कमजोर कर मतदाताओं को अपने पक्ष में आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं.
'भाजपा ने फिर साबित कर दिया कि...'
इसके पहले सपा चीफ ने शंकराचार्य के मामले पर सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा था- सच्चे संतों का अपमान करके भाजपा ने फिर साबित कर दिया है कि सिवाय अपनी पैसों की भूख और ख़ुदगर्ज़ी के, वो किसी की भी सगी नहीं है. भाजपाई की ये पुरानी ‘कु-कार्यशैली’ है कि जो भी भाजपाइयों के ज़ुल्म, ज़्यादती और जुर्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे भाजपाई झूठे आरोपों से धमकाने, दबाने, मिटाने की साज़िश करते हैं.
अखिलेश ने लिखा था कि भ्रष्ट-भाजपाई, उनके मुख़बिर संगी-साथी और सत्ता सजातीय वाहिनी की ‘बिगड़ी-तिकड़ी’ नकारात्मकता का आपराधिक त्रिगुट है, जिसका मंसूबा धन-कमाने के लिए सत्ता हासिल करना है. ये सब के सब अपने-अपने स्वार्थ के लिए एक अड्डे पर इकट्ठा हैं वैसे ये एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते हैं. इनकी आपसी खटपट की भूमिगत आवाज़ें अक्सर बाहर सुनाई दे जाती हैं.
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