उत्तराखण्ड के जंगलों में हाथियों की महागणना शुरू, आई काउंट मेथड का हो रहा इस्तेमाल
उत्तराखण्ड में हाथियों की गणना की जा रही है. यह अभियान पूरे प्रदेश में एक साथ चलाया गया. इसके लिए वनकर्मी लगातार लगे हुए हैं. हाथियों के सटीक आकलन के लिए 'आई काउंट मेथड' का यूज किया जा रहा है.

उत्तराखण्ड के जंगलों में हाथियों की महागणना का बड़ा अभियान मंगलवार 26 मई 2026 से शुरू हो गया है. यह गणना 30 मई तक चलेगी. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत कुमाऊं क्षेत्र के सभी उन वन प्रभागों को इसमें शामिल किया गया है, जहां हाथियों की मौजूदगी पाई जाती है. वन विभाग इस बार हाथियों की संख्या का बेहद सटीक आकलन करने के लिए आधुनिक तकनीक और खास रणनीति के साथ मैदान में उतरा है. गणना ‘आई काउंट मेथड’ (प्रत्यक्ष अवलोकन) के आधार पर की जा रही है.
हिमाचल से नेपाल तक है हाथियों का मूवमेंट
वनकर्मी सुबह और शाम की पाली में जंगलों में तैनात रहकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं. दोपहर में गर्मी बढ़ने पर हाथी घने जंगलों में छिप जाते हैं, इसलिए सुबह-शाम का समय सबसे उपयुक्त माना गया है. वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथी अत्यधिक घुमक्कड़ वन्यजीव हैं. उनका मूवमेंट हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र से लेकर टनकपुर होते हुए नेपाल तक फैला हुआ है. दोहरी गिनती से बचने के लिए पूरे प्रदेश में एक साथ यह गणना की जा रही है. साथ ही हाथियों की दिशा और उनके व्यवहार को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है.
कॉर्बेट में विशेष तैयारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अभियान बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है. रिजर्व की 72 बीटों में 200 से अधिक वनकर्मी लगे हुए हैं. इस बार भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा विकसित ‘इकॉलॉजी ऐप’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे गणना पूरी तरह डिजिटल और सटीक हो सकेगी. पहले यह काम कागजी फॉर्मेट में होता था. पिछली गणना के अनुसार उत्तराखण्ड में कुल 3,500 से अधिक हाथी थे, जबकि अकेले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 1,226 हाथी दर्ज किए गए थे. विभाग उम्मीद कर रहा है कि इस बार के आंकड़े और अधिक सटीक होंगे.
यह महागणना सिर्फ संख्या जानने तक सीमित नहीं है. यह मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की बेहतर योजना बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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Source: IOCL

























