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पीएम पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी को कितना जानते हैं आप, पढ़ें-बचपन से लेकर पीएम बनने तक कैसा रहा सफर

नरेंद्र मोदी संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे।

लखनऊ, एबीपी गंगा। लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए नए मंत्रिपरिषद के साथ शपथ ली। शपथ लेने से पहले गुरुवार सुबह पीएम मोदी राजघाट और अटल समाधि पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को नमन किया। क्या आप जानते हैं, देश में इस वक्त जिस नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है वो कभी साधु बनना चाहते थे। इतना ही नहीं एक वक्त था जब उन्होंने चाय की दुकान भी लगाई थी। मोदी के जीवन में इसी तरह के कई उतार-चढ़ाव आए। आइए आपको पीएम मोदी के जीवन से जुड़ी रोचक बातें बताते हैं।

कुछ अलग से थे मोदी

नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिल्कुल अलग थे। काम भी अलग तरह का कर जाते थे। एक बार वो घर के पास के शर्मिष्ठा तालाब से एक घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर लेकर आ गए। उनकी मां ने कहा बेटा इसे वापस छोड़ आओ, नरेंद्र इस पर राजी नहीं हुए। फिर मां ने समझाया कि अगर कोई तुम्हें मुझसे चुरा ले तो तुम पर और मेरे पर क्या बीतेगी, जरा सोचो। बात नरेंद्र को समझ में आ गई और वो उस घड़ियाल के बच्चे को तालाब में छोड़ आए।

नाटकों का शौक

नरेंद्र मोदी को हम कई तरह के गेटअप में देखते हैं। दरअसल, स्टाइल के मामले में मोदी बचपन से ही थोड़े अलग थे। कभी बाल बढ़ा लेते थे तो कभी सरदार के गेटअप में आ जाते थे। रंगमंच उन्हें खूब लुभाता था। नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने रोल पर काफी मेहनत भी करते थे।

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बचपन से बोलने की कला में महिर

नरेंद्र मोदी वडनगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थ। पढ़ाई में नरेंद्र एक औसत छात्र थे, लेकिन पढ़ाई के अलावा बाकी गतिविधियों में वो बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। एक तरफ जहां वो नाटकों में हिस्सा लेते थे, वहीं उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन किया था। बोलने की कला में तो उनका कोई जवाब नहीं था, हर वाद विवाद प्रतियोगिता में मोदी हमेशा अव्वल आते थे।

संन्यासी बनना चाहते थे मोदी

बचपन में नरेंद्र मोदी को साधु संतों को देखना बहुत अच्छा लगता था। मोदी खुद संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे मोदी

एक चाय बेचने वाला कभी देश का पीएम भी बनेगा ये किसी ने सोचा नहीं था। बचपन से ही उनका संघ की तरफ खासा झुकाव था और गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था। 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली। इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे।

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कमाल का मैनेजमेंट

नरेंद्र मोदी बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे। आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे। आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था। इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में आने वाली हर चिट्ठी को खोलने का काम भी नरेंद्र मोदी को ही करना होता था। नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया।

आडवाणी की रथयात्रा में निभाई अहम भूमिका

1980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा। वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए। नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की, इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए।

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सौंपी गई गुजरात की कमान

मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया, इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया। इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे। लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई। उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।

जुड़ गया काला अध्याय

वर्ष 2002 में गुजरात ही नहीं पूरे देश के इतिहास में वो काला अध्याय जुड़ गया जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं था। गोधरा में एक ट्रेन में सवार 50 हिंदुओं के जलने के बाद पूरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए हैं। दंगों में धूमिल हुई छवि के बावजूद वर्ष 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में भी मोदी की जीत हुई।

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दंगों को न रोकने का आरोप

मुस्लिम विरोधी दंगों में करीब 1000 से 2000 लोग मारे गए। मोदी पर इल्जाम लगा कि उन्होंने दंगों को भड़काने का काम किया। आरोप ये भी लगा कि वो चाहते तो दंगे रोक सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 2012 में उन्हीं की मंत्री माया कोडनानी समेत 30 अन्य को 28 साल जेल की सजा सुनाई गई।

विचलित नहीं हुए मोदी, बढ़ते गए कदम  

वर्ष 2005 में मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से इन्कार कर दिया। हालांकि नरेंद्र मोदी इससे बिलकुल भी विचलित नहीं हुए। नरेंद्र मोदी की राजनीतिक ताकत में लगातार इजाफा होता रहा। मोदी ने सत्ता संभालने के साथ ही खुद को राजनीतिक संगठन मजबूत करने और राज्‍य के विकास के कामों में लगा दिया। उद्योग की बात हो या कृषि की, मोदी ने लोगों के सामने एक बेहतर विकल्‍प देने की कोशिश की। नतीजा यह रहा कि कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्‍थाओं ने उनके काम की तारीफ की।

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राज्य में मजबूत होती गई पकड़

मोदी पर आरोप लगते रहे लेकिन राज्य की राजनीति पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई। मोदी के खिलाफ दंगों से संबंधित कोई आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए हैं। हालांकि, खुद मोदी ने भी कभी दंगों को लेकर न तो कोई अफसोस जताया है और न ही किसी तरह की माफी मांगी है। महत्वपूर्ण है कि दंगों के चंद महीनों के बाद ही जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की थी तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया और फिर जीतकर लौटे।

अमेरिका ने नहीं दिया वीजा, ब्रिटेन ने तोड़ा रिश्ता

मोदी पर आरोप लगे कि वे दंगों को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया। जब भारतीय जनता पार्टी में उन्हें पद से हटाने की बात उठी तो उन्हें तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और उनके खेमे की ओर से समर्थन मिला और वे पद पर बने रहे। गुजरात में हुए दंगों की बात कई देशों में उठी और मोदी को अमरीका जाने का वीजा नहीं मिला। ब्रिटेन ने भी दस साल तक उनसे अपने रिश्ते तोड़े रखे।

इंटरनेट पर पॉपुलर हैं मोदी

नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया। वो आम तौर पर अपने आधी बाजू के कुर्ते में नजर आते हैं। नरेंद्र मोदी तकनीक का इस्‍तेमाल भी बखूबी करते है। फेसबुक और ट्विटर पर देखें तो सबसे ज्‍यादा उनके फॉलोअर्स मिल जाएंगे। इंटरनेट पर पॉपुलर नेताओं की सूची में वो अव्‍वल हैं।

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2014 और 2019 में किया कमाल

पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की और अब 2019 लोकसभा चुनाव में भी पीएम मोदी के कदम और आगे बढ़े हैं।

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