चारधाम यात्रा को लेकर देहरादून प्रशासन अलर्ट, 15 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का अल्टीमेटम
Dehradun News: इस बार रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था पहले से कई ज्यादा मजबूत की गई है. ऋषिकेश में 30 और विकासनगर में 20 काउंटर चौबीसों घंटे काम करेंगे. इसके साथ ही ऑफलाइन भी व्यवस्था रहेगी.

उत्तराखंड में देहरादून जिला प्रशासन इस बार चारधाम यात्रा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता. 'अतिथि देवो भव:' की उस पुरानी परंपरा को जीवंत करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने साफ कहा है कि यात्रियों को किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होनी चाहिए, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े.
इसी के तहत गुरुवार को डीएम बंसल ने सभी संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक की और 15 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का सीधा अल्टीमेटम दिया है. उनका कहना था कि चारधाम यात्रा महज एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है. यह देवभूमि की आस्था और लाखों श्रद्धालुओं के भरोसे का सवाल है.
इस बार रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था पहले से कई ज्यादा मजबूत की गई है. ऋषिकेश में 30 और विकासनगर में 20 काउंटर चौबीसों घंटे काम करेंगे. जिन यात्रियों को ऑनलाइन रेजिस्ट्रैशन में दिक्कत है, उनके लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन और मोबाइल टीमों की अलग से व्यवस्था रहेगी. यानी अब तकनीक की दीवार किसी श्रद्धालु के रास्ते में नहीं आएगी.
होल्डिंग पॉइंट्स में मिलेंगी घर जैसी सुविधाएं
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप, आईडीपीएल, कटापत्थर, हरबर्टपुर और नया गांव जैसे होल्डिंग पॉइंट्स पर इस बार 'जर्मन हैंगर' टेंट लगाए जाएंगे. यहां रुकने वाले यात्रियों को मेडिकल चेकअप, साफ पीने का पानी, भोजन और स्वच्छ शौचालय, सब कुछ एक ही जगह मिलेगा. आने-जाने के लिए शटल बस सेवा भी शुरू की जाएगी ताकि किसी को भटकना न पड़े.
स्थानीय हाथों से बनेगा यात्रियों का खाना
भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी इस बार स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी. इससे एक तरफ यात्रियों को ताजा और सुलभ खाना मिलेगा, तो दूसरी तरफ स्थानीय महिलाओं और समूहों को रोजगार भी. आपातकाल के लिए अलग से फूड पैकेट्स का भंडार भी तैयार रखा जाएगा.
स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर पूरा ध्यान
यात्रा मार्ग पर विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहेंगे और पर्याप्त टेस्टिंग किट के साथ एंबुलेंस भी मुस्तैद रहेंगी. वाहनों की फिटनेस जांच के बाद ही ग्रीन कार्ड मिलेगा. यानी सड़क पर कोई जर्जर गाड़ी नहीं दिखेगी. नोडल और सेक्टर अधिकारियों के साथ पुलिस, होमगार्ड और स्वयंसेवकों की तैनाती हर अहम मोड़ पर होगी. प्रमुख चौराहों पर LED स्क्रीन लगाई जाएंगी ताकि यात्री रियल-टाइम जानकारी से वाकिफ रहें.
जिलाधिकारी बंसल के शब्दों में कहें तो- "श्रद्धालु दूर-दूर से आस्था लेकर आते हैं, हमारी जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षित, सहज और संतुष्ट होकर लौटें. " इस बार का संकल्प सिर्फ व्यवस्था का नहीं, बल्कि उस विश्वास को बनाए रखने का भी है जो देवभूमि की पहचान है.
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Source: IOCL


























