अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सियासी घमासान, मंत्री सुबोध उनियाल बोले- सबूत हो तो सामने लाए विपक्ष
Dehradun News: मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच को सत्र न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तीनों ने सही ठहराया है. अदालत ने भी सीबीआई जांच को जरुरी नहीं माना.

उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. विपक्ष के लगातार हमलों के बीच मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि यदि किसी के पास कोई ठोस सबूत है तो सामने लाए, सरकार हर तरह की जांच के लिए तैयार है.
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच को सत्र न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तीनों ने सही ठहराया है. अदालत ने स्वयं माना है कि इस प्रकरण में सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रमाण के बार-बार सवाल उठाना केवल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है.
दरअसल, तीन साल पुराने इस मामले ने उस वक्त फिर तूल पकड़ लिया जब हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो सामने आने के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई. कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गईं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए.
पूर्व विधायक की कथित पत्नी के फेसबुक लाइव से हंगामा
यह विवाद भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी के फेसबुक लाइव वीडियो के बाद शुरू हुआ. वीडियो में महिला ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक कथित वीआईपी ‘गट्टू’ का जिक्र किया और दावा किया कि वह भाजपा का बड़ा नेता है. उन्होंने एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य का नाम भी लिया और कहा कि हत्या वाले दिन उस वीआईपी की भूमिका पर सवाल उठने चाहिए. महिला ने एक ऑडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें पूरी जानकारी होने का दावा किया गया है.
कांग्रेस ने बनाया मुद्दा
वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया. उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर वायरल वीडियो दिखाया और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दस दिनों के भीतर सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन करेगी.
वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले वीआईपी का मुद्दा उछालकर अपनी राजनीतिक नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को वीआईपी के बारे में जानकारी है तो उसका नाम सार्वजनिक करे. भट्ट ने आरोप लगाया कि बिना पुष्टि के वायरल वीडियो के आधार पर राजनीति करना निंदनीय है और यह अंकिता की आत्मा का अपमान है.
सार्वजनिक रूप से मांगे गए थे सुबूत
भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि घटना के समय तत्कालीन डीजीपी ने सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि यदि किसी को वीआईपी के बारे में जानकारी हो तो सामने आए, लेकिन तब भी कोई आगे नहीं आया और न ही अब कोई ठोस सबूत दे रहा है. उन्होंने वायरल वीडियो को छेड़छाड़ किया हुआ बताते हुए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात कही.
अंकिता की हत्या कर शव नाहर में फेंका था
गौरतलब है कि 18 सितंबर 2022 को कोटद्वार स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था. घटना के करीब एक सप्ताह बाद नहर से शव बरामद हुआ था. एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों के खिलाफ करीब 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई.
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 97 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 47 गवाहों की अदालत में गवाही कराई गई. मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पर हत्या, साक्ष्य छुपाने, छेड़छाड़ और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत आरोप तय हुए थे. अन्य दो आरोपियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी हत्या और साक्ष्य छुपाने के आरोपों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
हालांकि, घटना के दिन अंकिता द्वारा अपने मित्र को रिजॉर्ट में एक वीआईपी के आने और उस पर अतिरिक्त सेवा के लिए दबाव बनाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उस वीआईपी की पहचान आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है. यही वजह है कि यह मामला अब भी सवालों के घेरे में बना हुआ है.
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Source: IOCL





















