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खेतों में उगाएंगे यह फसल तो कहलाएंगे कोरोना योद्धा, वन विभाग करेगा सम्मानित

औषधीय खेती की शुरुआत कर दूसरे किसानों को भी प्रेरित करने वाले किसानों को सम्मानित किये जाने की भी तैयारी है.

प्रयागराज: नये कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के बीच संगम नगरी प्रयागराज के अन्नदाताओं ने कम लागत व बिना रिस्क के खेती कर ज़्यादा मुनाफा कमाने का अनूठा नुस्खा खोज निकाला है. यहां के किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के नारे से प्रभावित होकर कोरोना की आपदा को अवसर में तब्दील कर लिया है और औषधीय खेती कर अपना भविष्य संवारने में लगे हुए हैं. कोरोना काल में औषधीय पौधों व फसलों से तैयार होने वाले इम्युनिटी बूस्टर की ज़बरदस्त डिमांड के चलते इन किसानों की पैदावार खेतों और बगीचों में तैयार होने से पहले ही हाथों-हाथ बिक जा रही है. सरकारी अमला भी औषधीय खेती करने वाले किसानों को अलग अंदाज़ में प्रोत्साहित कर रहा है. उन्हें सस्ते दाम पर बीज व पौधे मुहैया करा रहा है. ट्रेनिंग दे रहा है और साथ ही ऐसे अन्नदाताओं को कोरोना योद्धा करार देकर उन्हें सम्मानित करने की भी तैयारी में है.

प्रयागराज के किसानों में पिछले दो तीन महीनों में औषधीय खेती का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा है. गंगा किनारे की उपजाऊ मिट्टी वाले किसानों के लिए तो यह वरदान साबित हो रही है. इसके साथ ही बंजर ज़मीनों पर भी इसकी पैदावार की जा रही है. वन विभाग की मदद से किसान तुलसी - सहजन, हल्दी, लेमन ग्रास, खस, पामा रोया, सिट्रोनेला, जेरेनियम, पुदीना, रोज़मेरी, पचौरी, सोनामुखी, मेंथाल मिंट, अश्वगंधा, पिप्पली, घृतकुमारी, जंगली गेंदा, पचौली और पत्थरचूर के पौधे लगा रहे हैं. इन पौधों व तैयार फसलों से इम्युनिटी बूस्टर, सैनिटाइजर और आयुर्वेदिक दवाएं निर्मित हो रही हैं, लिहाजा इनकी डिमांड काफी ज़्यादा है. खेतों और बगीचों में तैयार होने से पहले ही ये पैदावार मुंहमांगे दाम पर बिक जा रही हैं. परम्परागत खेती से अलग हटकर की जा रही इस औषधीय खेती में लागत कम आती है. वन विभाग सब्सिडी और बाज़ार मुहैया करा रहा है. फसल जल्द तैयार हो जा रही है. रिस्क न के बराबर है और सबसे बड़ी बात यह कि कारोबारी इन्हें खरीदने के लिए खुद किसान के दरवाजे पर खड़े रहते हैं.

किसानों को औषधीय खेती में ज़्यादा फायदा नज़र आ रहा

किसानों का कहना है कि औषधीय खेती में उन्हें ज़्यादा फायदा नज़र आ रहा है, इसलिए वह न सिर्फ खुद इसे आगे भी जारी रखेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसे करने के लिए प्रेरित करेंगे. बाजार की ज़रुरत और फायदे को देखते हुए औषधीय खेती करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. प्रयागराज के डीएफओ वाई पी शुक्ल के मुताबिक़ औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ट्रेनिंग और सब्सिडी के साथ ही उनकी मदद की योजना वैसे तो कोरोना काल से पहले की है, लेकिन कोरोना ने इस प्रयोग को अब ज़रुरत में तब्दील कर दिया है. उनके मुताबिक़ किसानों को प्रोत्साहित करने का काम नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है. उनके मुताबिक़ औषधीय खेती करने वाले किसान कोरोना के खिलाफ जंग में अपना अहम योगदान दे रहे हैं, इसलिए इन्हें भी कोरोना योद्धा करार दिया जाना कतई गलत नहीं होगा.

डीएफओ वाईपी शुक्ल का कहना है कि औषधीय खेती की शुरुआत कर दूसरे किसानों को भी प्रेरित करने वाले किसानों को सम्मानित किये जाने की भी तैयारी है. फूलपुर इलाके के रेंजर अशोक साहू का कहना है कि वन विभाग की सब्सिडी और ट्रेनिंग से किसानों को आगे बढ़ने का नया मौका मिल गया है, इसलिए वह खुद को मजबूत करने के साथ ही कोरोना के खिलाफ जंग में भी अलग तरीके से अपना योगदान दे रहे हैं.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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