'चंदा चोरों अयोध्या छोड़ो', कंप्यूटर बाबा ने खोला मोर्चा; आंदोलन की चेतावनी
अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के राष्ट्रीय महासचिव कंप्यूटर बाबा समेत कई संतों ने प्रशासन पर बैठक रोक रोकने का आरोप लगाया. मामले मे CBI जांच कराने की बात भी कही.

अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर संत समाज की नाराजगी बढ़ती जा रही है. राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के राष्ट्रीय महासचिव कंप्यूटर बाबा समेत कई संतों ने प्रशासन पर बैठक रोकने और संतों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोकने का आरोप लगाया. संतों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जरूरत पड़ने पर CBI जांच कराने की बात कही है. वहीं संतों ने चेतावनी दी है कि अगर पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आई तो आंदोलन को देशभर में ले जाया जाएगा.
अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर संत समाज ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के राष्ट्रीय महासचिव कंप्यूटर बाबा समेत कई संतों ने आरोप लगाया कि बैठक में शामिल होने आ रहे साधु-संतों को पुलिस और प्रशासन ने रास्ते में रोक दिया. कंप्यूटर बाबा के मुताबिक संत समाज शांतिपूर्ण तरीके से बैठक कर चंदा चोरी के आरोपों पर चर्चा करना चाहता था, लेकिन प्रशासन की ओर से घेराबंदी कर संतों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोक दिया गया.
'छोटी मछलियों पर कार्रवाई, जबकि बड़ी मछली तक जांच पहुंची नहीं'
‘चंदा चोरों अयोध्या छोड़ो’ के नारे लगाते हुए कंप्यूटर बाबा ने दावा किया कि मामले में छोटी मछलियों पर कार्रवाई हुई है, जबकि बड़ी मछली तक जांच नहीं पहुंची. उन्होंने सवाल उठाया कि कथित तौर पर चोरी हुआ धन आखिर कहां गया और इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए. कंप्यूटर बाबा ने कहा कि जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती, संत समाज चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने देशभर में आंदोलन करने की चेतावनी भी दी.
वहीं राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि संत समाज मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहता था और बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण थी. उनका आरोप है कि इसके बावजूद प्रशासन ने संतों को रोक दिया और कार्यक्रम स्थल के गेट बंद कर दिए.
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इतनी बड़ी चोरी में LIU, खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नही?
प्रकाशानंद गिरी महाराज ने मामले की CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि इस मुद्दे को जन-जन के आंदोलन तक ले जाया जाएगा. उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी बड़ी रकम की कथित चोरी के दौरान स्थानीय प्रशासन, LIU और अन्य खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर संत समाज बड़ा आंदोलन करेगा.
वहीं रसिक पीठाधीश्वर जनमेजय शरण महाराज ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदा चोरी के मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक जांच पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है. जनमेजय शरण महाराज ने कहा कि जिन लोगों से कथित तौर पर संपत्ति या धन की रिकवरी हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ उनके सहयोगियों और संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में जांच कराने की रखी मांग
उन्होंने कहा कि जांच किसी साधु-संतों की टीम से नहीं, बल्कि सक्षम जांच एजेंसियों से निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग भी रखी. कथित क्लीन चिट के सवाल पर भी संतों ने नाराजगी जताई. जनमेजय शरण महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति को पहले से क्लीन चिट देने के बजाय जांच के आधार पर दोष तय होना चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर संत समाज की नाराजगी अब आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गई है. संतों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की पहचान की जाए और कथित तौर पर चोरी हुआ धन बरामद कर वापस कराया जाए.
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