पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने किया UGC का विरोध, BJP नेता ने बताया सनातन परंपरा के खिलाफ
UGC Guidelines Reaction: यूजीसी के नए कानून पर BJP नेता बृज भूषण शरण सिंह ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए खुलकर विरोध किया. उन्होंने कहा कि ऐसे कानून गांव की जमीनी सच्चाइयों को नजरअंदाज करेंगे.

यूजीसी के नए कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. इसी बीच BJP के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस कानून का खुलकर विरोध किया है. उनका बयान न केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि गांव और समाज की जमीनी सच्चाइयों से जुड़ा हुआ एक सशक्त संदेश भी माना जा रहा है.
बृज भूषण शरण सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि उनके घर के बच्चे आज भी ओबीसी बच्चों और दलित बच्चों के साथ खेलते हैं और उनके घर में बना भोजन सभी बच्चे एक साथ बैठकर खाते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी कानून, आदेश या अधिनियम के तहत नहीं होता, बल्कि यह सदियों से चली आ रही सनातन परंपरा है, जो समाज की नस-नस में रची-बसी है.
उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका दर्शन स्पष्ट था- जो समाज में पीछे है, उसे आगे लाना है, न कि समाज को खांचों में बांटना. बृज भूषण शरण सिंह के मुताबिक यूजीसी का यह नया कानून समाज में समझ और संवेदना का टकराव पैदा करेगा, जिससे भाईचारे की जड़ें कमजोर होंगी.
मेरे घर के बच्चे OBC और दलित बच्चों के साथ खेलते हैं- बृज भूषण शरण सिंह
अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर संदेश जारी कर उन्होंने कहा, 'मेरे घर के बच्चे ओबीसी और दलित बच्चों के साथ खेलते हैं, मेरे घर का खाना साथ बैठकर खाते हैं. यह किसी कानून से नहीं चलता, यह हमारी सनातन परंपरा है. पंडित दीनदयाल जी ने कहा था 'जो नीचे हैं, उन्हें ऊपर लाना है, समाज को बांटना नहीं है.'
यूजीसी कानून को लेकर उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि समाज को दफ्तरों में बैठकर नहीं चलाया जा सकता. समाज को समझना है तो गांव में आना पड़ेगा. उन्होंने कहा, “क्या आप चाहते हैं कि भविष्य में किसी घर में एंट्री हो और ओबीसी को रोक दिया जाए? क्या आप चाहते हैं कि दलित को घर की दहलीज पर खड़ा कर दिया जाए? आप ऐसा ही माहौल तैयार कर रहे हैं. गांव में शादी होती है तो हर समाज का नेग होता है, हर किसी का हक होता है. गांव ऐसे ही चलता है. ऑफिस में बैठकर आप यह नहीं समझ सकते कि गांव में क्या हो रहा है.”
सनातन परंपरा का हवाला, कानून पर सीधा आरोप
पूर्व सांसद ने हाल ही में आयोजित सनातन कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि कथा में 52 समाजों के सद्गुरुओं को आमंत्रित किया गया था. हर समाज से एक-एक वृक्ष लेकर ‘सनातन वाटिका’ बनाने का संकल्प लिया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कानून बनाकर सरकार उन सामाजिक प्रयासों को ही कमजोर कर रही है, जो समाज को जोड़ने का काम करते हैं.
बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि यह कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि वही सनातन परंपरा है जिसने सदियों से भारत को जोड़े रखा है. ऐसे कानूनों की कोई आवश्यकता नहीं है, जो समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम करें. उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि इस कानून को तत्काल वापस लिया जाए. उन्होंने विरोध कर रहे लोगों से भी आग्रह किया कि वे ओबीसी और दलित समाज के समझदार लोगों से संवाद करें और जमीनी सच्चाई को समझें.
उन्होंने कहा, “अगर लोकतंत्र को जिंदा रखना है तो गांव में क्या हो रहा है, यह देखना पड़ेगा. और इसका राष्ट्रीय स्तर पर विरोध करना पड़ेगा. सभी लोगों को मिलकर इसका विरोध करना होगा. ऐसे कानून मत लाइए जो समाज को फाड़ दें. इससे आने वाले समय में देश और राष्ट्र का बहुत नुकसान होगा. सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का होगा वे बंट जाएंगे.”
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Source: IOCL

























