आजमगढ़ में शिक्षा विभाग का बड़ा घोटाला, बिना अनुमति नियुक्तियों पर DIOS और प्रधानाचार्य समेत 6 पर केस
Azamgarh News: श्री देवा नंद संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ जाकर की गयीं हैं.जिसमें कई लोगों के फंसने के आसार हैं.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में शिक्षा विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है. यहां श्री देवा नंद संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ जाकर की गयीं हैं. जिसमें संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर के निर्देश पर प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक वीरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधान सहायक विधि चन्द्र यादव, प्रधानाचार्य रिंकी यादव, अलका त्रिपाठी व प्रियंका शिक्षिकाएं,व विद्यालय प्रबंधक श्रीकृष्ण मिश्रा समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है.
इस कार्रवाई से पूरे शिक्षा विभाग में खलबली मच गयी है. कार्रवाई उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अधिनियम 2000 और विनियमावली 2009 के उल्लंघन के आधार पर की गई है.
बिना अनुदान और बिना अनुमति के नियुक्ति का आरोप
संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर द्वारा शहर कोतवाली को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक ने बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और शासन स्तर पर अनुदान बहाली के निर्णय के बिना ही विद्यालय में प्रधानाचार्य रिंकी यादव, साहित्य अध्यापिका प्रियंका और अल्का त्रिपाठी का अनुमोदन कर दिया. यह कार्यवाही उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थी और नियमों के विपरीत पाई गई. अनुमोदन पत्र पर अधिकारी के हस्ताक्षर के नीचे किसी कार्यालय सहायक के हस्ताक्षर न होने से पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो गई.
व्हाट्सएप पर भेजा अनुमोदन पत्र
मामला तब और गंभीर हुआ जब जिला विद्यालय निरीक्षक ने संयुक्त शिक्षा निदेशक से फोन पर बातचीत में पहले अनुमोदन निरस्त करने की बात कही, लेकिन बाद में वही अनुमोदन पत्र व्हाट्सएप से भेजा गया. निरीक्षक ने दावा किया कि प्रधान सहायक विधि चन्द्र यादव ने कूट रचित तथ्यों से उन्हें गुमराह कर हस्ताक्षर कराए, लेकिन यादव ने स्पष्टीकरण में अपनी भूमिका से इनकार किया. जांच में पाया गया कि पहले नियम-विरुद्ध अनुमोदन जारी किया गया और फिर निरस्त, जिससे भविष्य में उच्च न्यायालय से वेतन भुगतान संबंधी आदेश आने पर विभाग को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
2016 में रोका गया अनुमोदन
विद्यालय की अनुदान स्थितिपत्र में उल्लेख है कि विद्यालय वर्ष 2015 में अनुदान सूची में शामिल हुआ था, लेकिन 2016 में शिकायतों के बाद अनुदान रोक दिया गया. अनुदान बहाली का प्रकरण शासन स्तर पर लंबित है, फिर भी केवल विद्यालय प्रबंधन के पत्र के आधार पर अनुमोदन किया जाना उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के नियम-3 का उल्लंघन है. संयुक्त शिक्षा निदेशक ने आशंका जताई कि इससे विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया.
पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की कार्रवाई
एएसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर शहर कोतवाली पुलिस ने प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक वीरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य रिंकी यादव, शिक्षक प्रियंका और अल्का त्रिपाठी, प्रधान सहायक विधि चन्द्र यादव तथा प्रबंधक श्रीकृष्ण मिश्र के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है. विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी.
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