अयोध्या दीपोत्सव में 2100 ड्रोन से शो, 13 राज्यों के 1000 कलाकार दिखाएंगे दम
अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा की. उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं दीपोत्सव की धार्मिक गरिमा और संस्कृतिक परंपरा के मुतबिक हों.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आगामी 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष दिशा निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन के इंतजाम पुख्ता हों. इसके साथ ही दीपोत्सव को सनातन चेतना, जनस्था और वैश्विक गौरव का महापर्व जैसे मनाने पर जोर होगा.
इस आयोजन में 13 राज्यों के कलाकार अपनी प्रस्तुति से इस और भव्य बनाएंगे. इसके साथ ही ड्रोन शो और सरयू घाट पर आरती इसे और मनमोहक मनाएंगे. इस दौरान और भी कई आयोजन किए जा रहे हैं.
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दीपोत्सव की प्रमुख विशेषताएं:
- राम की पैड़ी और संपूर्ण अवधपुरी में भव्य दीप प्रज्ज्वलन होगा.
- 2100 स्वदेशी ड्रोनों से रामायण आधारित आकाशीय शो प्रस्तुत किया जाएगा.
- मुख्य आकर्षण होंगे दिव्य सरयू आरती, लेजर शो और हरित आतिशबाजी.
- 2147 प्रतिभागी सरयू आरती में हिस्सा लेंगे.
- राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी.
- करीब 35 हजार स्वयंसेवक आयोजन में सहभागी रहेंगे.
- 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधि और विदेशी राजनयिक भी साक्षी बनेंगे.
- देश के 13 राज्यों के लगभग 1000 कलाकार लोककला और नृत्य की प्रस्तुति देंगे.
डिजिटल माध्यम से पांच करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव को पांच करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा साकेत महाविद्यालय से रामायण अधारती शोभायात्रा निकलेगी. रामकथा पार्क में भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक का आयोजन भी रखा गया है. मुख्यमंत्री योगी के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी व्यवस्थाएं दीपोत्सव की धार्मिक गरिमा और संस्कृतिक परंपरा के मुतबिक हों.
वाल्मीकि जयंती पर कार्यक्रम
26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर सभी जिलों में रामायण पाठ और संस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ आयोजित होगा.
चित्रकूट घाट के विकास पर जोर
इसके साथ ही चित्रकूट के रामघाट के व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण विकास पर भी जोर दिया गया.इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता दी जाएगी. रामघाट पर दुकानों के व्यवस्थित पुनर्वास, नालों के सुदृढ़ीकरण और धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य कराए जाएंगे. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भविष्य में बाढ़ की आशंका को देखते हुए निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
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