CAA विरोध: योगी सरकार को झटका, हाईकोर्ट का आदेश- तुरंत हटाएं आरोपियों के पोस्टर
लखनऊ में हिंसा व आगजनी करनेवालों के नाम उजागर करनेवाले पोस्टर को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार को पोस्टर हटाने को कहा है।

प्रयागराज, एबीपी गंगा। सीएए विरोध के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने के मामले में योगी सरकार को झटका लगा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तुरंत आरोपियों के पोस्टर हटाने का आदेश दिया है। बतादें कि इससे पहले अदालत ने प्रदर्शनकारियों से क्षति की वसूली के लिये पोस्टर लगाने की राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर रविवार को सुनवाई पूरी कर ली थी। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आज दलील दी कि कोर्ट को इस तरह के मामले में जनहित याचिका की तरह हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोर्ट को ऐसे कृत्य का स्वतः संज्ञान नहीं लेना चाहिए जो ऐसे लोगों द्वारा किए गए हैं जिन्होंने सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। महाधिवक्ता ने कथित सीएए प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने की राज्य सरकार की कार्रवाई को 'डराकर रोकने वाला कदम' बताया ताकि इस तरह के कृत्य भविष्य में दोहराए न जाएं। इससे पूर्व, इस अदालत ने 7 मार्च, 2020 को पिछले साल दिसंबर में सीएए के विरोध के दौरान हिंसा के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने की घटना का स्वतः संज्ञान में लिया था। अदालत ने शनिवार को ही अपने आदेश में लखनऊ के डीएम और मंडलीय आयुक्त को उस कानून के बारे में बताने को कहा था जिसके तहत लखनऊ की सड़कों पर इस तरह के पोस्टर एवं होर्डिंग लगाए गए।
हालांकि कोर्ट इस बात से सहमत नहीं थी और पूछा कि ऐसा कौन से कानून है जिससे सरकार को सार्वजनिक स्थान पर फोटो चस्पा करने का अधिकार मिल जाता है। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला सोमवार को दिन में दो बजे सुनाया जाएगा। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता के अलावा अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी, मुर्तजा अली अपर शासकीय अधिवक्ता ने पक्ष रखा।
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