मजदूरों की हालत पर नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट, प्रवासी कहे जाने पर जताया एतराज
अदालत ने कहा है कि मजदूरों को देश के किसी भी राज्य में जाकर वहां रोजगार हासिल करने का संवैधानिक अधिकार है, इसलिए उन्हें प्रवासी नहीं कहा जा सकता.

प्रयागराज, मो. मोईन। लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों का अपने घरों की ओर पलायन जारी है. इसी बीच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजदूरों की हालत पर नाराजगी जताई है. साथ ही अदालत ने उन्हें प्रवासी कहे जाने पर सख्त एतराज भी जताया है. अदालत ने कहा है कि मजदूरों को देश के किसी भी राज्य में जाकर वहां रोजगार हासिल करने का संवैधानिक अधिकार है, इसलिए उन्हें प्रवासी नहीं कहा जा सकता.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश में रहने वाले मजदूरों को एक से दूसरे राज्य में जाने पर प्रवासी बताया जा रहा है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मजदूरों के मामले में सुनवाई करते हुए अपने लिखित आदेश में तथाकथित प्रवासी मजदूर (So Called Migrants) कहा है.
यूपी सरकार को भेजा नोटिस इसके अलावा अदालत ने इस मामले में यूपी सरकार को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है. अदालत ने यूपी सरकार से बाहर से आने वाले मजदूरों के इलाज, उनके रोजगार और पुनर्वास के बारे में जवाब तलब किया है. अदालत ने सरकार से इन तीनों बिंदुओं पर बनाई गई नीतियों, योजनाओं व गाइडलाइन का ब्योरा पेश करने को कहा है. अदालत ने सरकार से यह भी पूछा है कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
अदालत ने ये भी कहा कि मुश्किल वक्त में मजदूरों के खाने व रहने का उचित इंतजाम करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है. उनके साथ ऐसा व्यवहार न करें, जिससे मजदूर राज्यों को छोड़कर अपने घर जाने को मजबूर हों. मजदूरों को भूखा-प्यासा रखकर उन्हें राज्य छोड़ने को मजबूर न किया जाए.















