12 हजार सैलरी, 9 घंटे की शिफ्ट... कॉलेज में लगी लंगूर की ड्यूटी, जानें क्या करता है काम?
Aligarh News In Hindi: अलीगढ़ के धर्म समाज महाविद्यालय में 12 हजार रुपये महीने की तनख्वाह पर लंगूर को गार्ड की नौकरी लगी है. अब यह खबर लोगों में चर्चा का विषय बनी है.

जब आप कॉलेज आते हैं, तो आपकी सबसे बड़ी चिंता पढ़ाई, नए दोस्त और नए अनुभव होती है लेकिन सोचिये, अगर हर कदम पर बंदर आपका स्वागत करता हो? यकीन कीजिए, अलीगढ़ के धर्म समाज महाविद्यालय में यही हाल था. बंदरों की तादाद इतनी बढ़ गई थी कि वे छात्रों के लिए खतरा बन गए थे.
बंदरों के आतंक से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सबका ध्यान खींचा है. यहां 12,000 महीने की सैलरी पर एक लंगूर को कैंपस गार्ड बनाया गया है. ‘गोलू’ नामक 12 साल का यह लंगूर सुबह 8 से शाम 5 बजे तक बंदरों से कैंपस की रक्षा करता है, और उसकी मौजूदगी से अब बंदर कैंपस में तक जाने की हिम्मत नहीं करते.
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छात्रों के अलावा स्टाफ के लिए परेशानी बने थे बंदर
प्राचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज बताते हैं कि पिछले वक्त में बंदर छात्रों और स्टाफ के लिए परेशानी बन गए थे. वो न सिर्फ खाना छीनते थे, बल्कि किताबें फाड़ने से लेकर कई बार हमला भी करते थे. पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा था. तभी कॉलेज ने यह अनोखा तो कम, कारगर तो ज्यादा, फैसला लिया.
सिर्फ गार्ड नहीं, बल्कि छात्रों का अच्छा दोस्त बन गया गोलू
गोलू अब सिर्फ एक गार्ड नहीं, बल्कि छात्रों का दोस्त भी बन गया है. छात्र-छात्राएं उसकी सेल्फी लेने में जुट जाते हैं और उसे परिवार के सदस्य जैसा समझते हैं. उसका खाना भी खास रखा जाता है—बैंगन, पपीता, आलू, टमाटर और रोटी. छात्र यदा गौतम कहती हैं, "पहले तो कॉलेज आते ही डर लगता था, खाना लेकर आना मुश्किल था. अब गोलू की वजह से हमें चैन मिल गया है."
गोलू की मौजूदगी में बदला कैंपस का माहौल
इसी तरह माधुरी और अतुल शर्मा जैसे छात्र भी मानते हैं कि गोलू की मौजूदगी ने कैंपस का माहौल पूरी तरह बदल दिया है.जहां पहले डर और तनाव था, अब वहां सुरक्षा और मुस्कान है. यह कहानी सिर्फ बंदरों के आतंक को खत्म करने की नहीं, बल्कि एक छोटे से सुझाव और हिम्मत के जादू की है. कैसे एक 'गोलू' ने स्कूल को फिर से जगह बना दिया, जहां शिक्षा और खुशी दोनों साथ-साथ होती हैं.
अगली बार जब आप धर्म समाज महाविद्यालय जाएं, तो गोलू को देखना मत भूलिएगा, वह सिर्फ लंगूर नहीं, वहां की पहचान है, सुरक्षा का नाम है.























