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Aligarh News: 11 साल के आशीष ने बना डाला वोटिंग सॉफ्टवेयर, टेस्ट के लिए जिला निर्वाचन दफ्तर को भेजा

UP News: अलीगढ़ के रहने वाले 11 साल के आशीष ने ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है जिससे मतदाता को वोट डालने के लिए मतदान केंद्र नहीं जाना पड़ेगा. सरकार से मंजूरी मिली तो इसी चुनाव में इसाका प्रयोग किया जएगा.

Aligarh News: अलीगढ़ के आशीष ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है जिससे लोग घर बैठे वोट डाल सकते हैं. कोरोना काल में बनाया गया ये सॉफ्टवेयर कंप्यूटर वह खराब होने की वजह से खत्म हो गया था. इसके बाद नया कंप्यूटर लाने के बाद 11 साल के बच्चे ने एक बार फिर अपनी चंद दिनों की मेहनत और मशक्कत से उसे सॉफ्टवेयर को बनाने के बाद देश भर में कंप्यूटर बॉय का डंका बजा दिया है.

अलीगढ़ के आशीष ने 11 साल की आयु में अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से एक बड़ा कारनामा कर दिखाया जिससे कि देश पर चुनाव के समय मे खर्च होने वाला लगभग 60 हजार करोड़ रुपए को बचाया जा सकता है. वहीं समय के साथ चुनाव के समय मे तमाम तरह की व्यवस्थाएं इधर से उधर हो जाती हैं, इस सॉफ्टवेयर के जरिए काफी समय बचाया जा सकता है. इस सॉफ्टवेयर को बनाने में सरकार से आशीष के परिवार वालों ने मदद मांगी है. परिवार का कहना है कि सरकार अगर मदद करती है तो 19 तारीख वाले इलेक्शन से पहले  सॉफ्टवेयर पूरा बना कर तैयार किया जा सकता है.

कैसे बनाया यह सॉफ्टवेयर
आशीष ने जानकारी देते हुए बताया कि,पाइथन, माइक्रोसॉफ्ट, जीमेल आदि विषयों पर उसने नौ किताबें लिखने का रिकार्ड बनाया है, 11 साल के आशीष को  कंप्यूटर-लैपटॉप  खिलौनों की तरह लगते है. उसका कहना है कि उसने ई वोटिंग का ऐसा सिस्टम विकसित किया है जिससे घर बैठे न सिर्फ स्मार्ट फोन से मत डाले जा सकेंगे बल्कि यह भी पता चलेगा कि आपका वोट किस प्रत्याशी को गया. आशीष ने यह भी दावा है कि सिर्फ पांच मिनट में वोटों की गिनती भी की जा सकेगी. 'मेरा वोट' नाम से विकसित इस ई वोटिंग सिस्टम को आशीष ने परीक्षण के लिए निर्वाचन आयोग, गृह मंत्रालय और जिला निर्वाचन कार्यालय को भेजा है.

सरकार की मंजूरी का इंतजार
आशीष का कहना है कि कोरोना काल के समय में कंप्यूटर पर एक सॉफ्टवेयर बनाया जिससे कि ऑनलाइन अपना वोट डाला जा सके. जहां वोटरों पर सरकार काफी पैसा खर्च करती है उसे बचाया जा सके. आशीष ने बताया कि उसने पिछले साल काम किया था कंप्यूटर खराब होने के कारण सारा डाटा उड़ गया. मैंने इस पर फिर से दोबारा काम किया है और यह सॉफ्टवेयर तैयार किया है. आशीष ने बताया कि सॉफ्टवेयर बनाने में उनके पिता का हाथ है उन्होंने ही इसकी प्रेरणा दी थी. अब सिर्फ सरकार के अप्रूवल की जरूरत है. अगर सरकार अप्रूवल देती है तो 19 अप्रैल के पहले चरण के चुनाव से पहले ही वह सॉफ्टवेयर के जरिए वोट डलवा सकते हैं.

कहां रहता है आशीष का परिवार
अलीगढ़ के महावीर गंज निवासी प्रशांत अग्रवाल एक एडवोकेट हैं. उनकी पत्नी मां डॉ रेखा गुप्ता गृहणी हैं. बड़ी बहन सौम्या अग्रवाल हाईस्कूल की छात्रा है. आशीष खुद आठवीं कक्षा का छात्र है. वह नौरंगी लाल इंटर कॉलेज में पढ़ता है. कोडिंग के मास्टर ने अब तक पाइथन, माइक्रोसॉफ्ट, जीमेल आदि विषयों पर नौ डिजिटल किताबें  लिखी हैं. उन्होंने कई वेबसाइट और लगभग 200 गेम भी डिजाइन किए हैं. उसने कोविड काल में कंम्प्यूटर को अपना दोस्त बनाया. आज उसे कंप्यूटर बॉय का तमगा मिला हुआ है. 

आशीष के पिता ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरू से ही कंप्यूटर पर मैंने इसे कुछ ना कुछ बनाते हुए देखा है मुझे लगा कि यह कुछ बड़ा कर सकता है. इसलिए मैंने कोरोना काल में यह बच्चे कंप्यूटर पर गेम खेलते रहते थे तो मैंने उन्हें नसीहत देते हुए कहा अगर कंप्यूटर चलाना है तो कुछ ऐसा बनाओ जो के देश के काम आए तो आशीष ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बना दिया जो कि देश के 60 हजार करोड रुपए को बचा सकता है. सरकार से उम्मीद है कि इस सॉफ्टवेयर को पूरा कंप्लीट करने में मदद करेगी.

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