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अलीगढ़ का घंटाघर बेहद खास, पांच मंजिला इस इमारत पर नहीं होता भूकंप का असर

अलीगढ़ में बने घंटाघर की नींव 1992 में रखी गई थी. घंटाघर को बनाने में 16,380 रुपये खर्च हुए थे. भूकंप आने पर भी इस घंटाघर को कोई नुकसान नहीं होता. इसे पहले हैरिसन क्लॉक टावर के नाम से जाना जाता था.

Aligarrh News: आज के आधुनिक युग में लोग मोबाइल में समय देखकर दिन का पता लगाते है. लेकिन पुराने समय में कोई दौर हुआ करता था जब लोग टन-टन की आवाज सुनने के बाद समय का पता लगाया करते थे. साथ ही सरकारी कार्यालय व ऑफिस में जाने वाले लोग भी घंटाघर को देखकर समय का पता लगाया करते थे. जैसे-जैसे लोग आधुनिक युग में बढ़ते चले गए ठीक उसी तरह से आधुनिक युग में संसाधनों की बढ़ोत्तरी के बाद घंटाघर को पीछे छोड़ दिया गया.

दरअसल हम बात कर रहे हैं अलीगढ़ के जिला मुख्यालय व अलीगढ़ एसएसपी कार्यालय सहित अन्य उन कार्यालयों की जहां से चंद कदमों की दूरी पर यह घंटाघर स्थित है. जिसके सामने कचहरी और जिसके पीछे नगर निगम कार्यालय व आसपास दर्जनों सरकारी कार्यालय मौजूद है. यह घंटाघर समय के साथ बदल गया है. पहले लोग इसे समय के घंटाघर के नाम से जानते थे. लेकिन अब इसे लोग भव्य इमारत के नाम से पहचानने लगे हैं. यही कारण है शाम ढलते ही यहां सेल्फी प्वाइंट के रूप में इसे देखा जा सकता है.

1992 में रखी गयी पांच मंजिला घंटाघर की नींव 
 इस घंटाघर की नींव सन 1992 में रखी गई थी. सन् 1994 में यह घंटाघर आम जनता के लिए घड़ी के रूप में विकसित हुआ और पश्चिम उत्तर प्रदेश का उन कारीगरों का बेहतरीन नमूना था जिनके द्वारा इसका निर्माण किया गया अंग्रेजी शासन काल में बनाए गए इस पांच मंजिला घंटाघर को बनाने के लिए स्टोन और ब्रिक्स पत्थर का इस्तेमाल किया गया था. बताया जाता है एक हैरिसन नाम के अंग्रेज कलेक्टर के द्वारा इसका निर्माण कराया गया था. 

भूकंप आने पर भी कोई नुकसान नहीं घंटाघर को
इस घंटाघर को लेकर बताया जाता है कि इस घंटाघर में सबसे ज्यादा खास बात यह है कि यह भूकंप आने के बाद भी इस घंटाघर का भूकंप कुछ नहीं बिगाड़ सका. कारीगरों  के द्वारा उस हिसाब से इस घंटाघर को बनाया है. जिससे भूकंप के आने के बाद इसकी सुइया एक लॉक के रूप में इस घंटाघर को सुरक्षित करती हैं. जिन सूइयों की लंबाई और चौड़ाई करीब 15 मीटर की है. अगर बात अंग्रेजी शासन काल की कही जाए तो इसे उस समय में हैरिसन क्लॉक टावर के नाम से पहचाना जाता था.

घंटाघर को लेकर बताया जाता है इसको बनवाने के लिए उस समय के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा चंदा भी किया गया था. इस घंटा घर पर 16380 रुपए खर्च हुए. इसमें सिर्फ 5000 रुपए की घड़ी इसमें लगी हुई है. जो कि चौथी मंजिल पर लोगों को समय का बोध कराती है. घंटाघर की खूबसूरती की अगर बात कही जाए तो नगर निगम के प्रयासों के बाद इसको और भी ज्यादा भव्य बनाया गया है.

क्या बोले नगर आयुक्त अमित आसेरी
नगर आयुक्त अलीगढ़ अमित आसेरी के द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया नगर निगम क्षेत्र को लगातार सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए उनके द्वारा तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही है. शहर में कई सड़कों और पार्कों  का सौंदर्यीकरण किया गया है. जिसमें नकवी पार्क व ठंडी सड़क  सहित कई जिम व अन्य पार्कों को सुरक्षित किया गया है. उनमें से घंटाघर पार्क को भी चारों ओर से सुरक्षित करते हुए उसको भव्य बनाया गया है. घंटाघर पार्क में रात में भी उजाले का एहसास किया जा सकता है. साथ ही घण्टाघर की साफ सफाई की व्यवस्था भी समय समय पर की जाती है. 

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