चुनाव 2019: जानिए आपके एक वोट पर आता है कितना खर्च
Loksabha Election 2019: पिछले लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने प्रति मतदाता लगभग 46 रुपये से अधिक खर्च किए। 2019 के चुनाव में प्रति मतदाता खर्च बढ़ सकता है।

नई दिल्ली, एबीपी गंगा। चुनाव को ऐसे ही नहीं ‘लोकतंत्र का महापर्व’ कहते हैं। एक-एक वोट की कीमत होती है और मतदाताओं को भी अपने वोट की ताकत को जानना जरूरी होता है। इन वोटों की कीमत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 1999 में महज एक वोट से अटल सरकार गिर गई थी। वहीं, 1917 में सरकार पटेल अहमदाबाद म्यूनिसिपल कार्पोरेशन का चुनाव केवल एक वोट से हार गए थे। ऐसे में आपका एक वोट देश की दशा और दिशा बदल सकता है।
प्रति मतदाता 60 पैसे खर्च से 46 रुपये तक
- पिछले लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने प्रति मतदाता लगभग 46 रुपये से अधिक खर्च किए।
- 2019 के चुनाव में प्रति मतदाता खर्च बढ़ सकता है।
- 1952 का लोकसभा चुनाव सबसे सस्ता चुनाव था। इसमें प्रत्येक मतदाता पर केवल 60 पैसे खर्च हुए थे। जबकि सरकार ने कुल 10.45 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
- 2009 के चुनाव में प्रत्येक मतदाता पर 12 रुपये खर्च हुए। कुल खर्च 1483 करोड़ रुपये का आया।
- 2004 के लोकसभा चुनाव में सरकारी खजाने पर 1114 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था।
पहले लोकसभा चुनाव में सबसे कम हुआ खर्च
आंकड़ों के मुताबिक, स्वतंत्र भारत में हुए पहले लोकसभा चुनाव (1952) पर सबसे कम खर्च हुआ था। 1952 के आम चुनाव में 10 करोड़ 45 लाख का खर्चा आया था, यानी प्रति मतदाता करीब 60 पैसे का खर्च।
प्रत्येक वोट की होती है कीमत, इतना खर्च करता है आयोग
आपका वोट लोकतंत्र को मजबूती देता है और इस वोट की कीमत भी होती है। प्रत्येक मतदाता को मतदान के लिए बूथ तक लाने में चुनाव आयोग मोटी रकम खर्च करता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में आयोग ने प्रत्येक मतदाता पर 46 रुपये से अधिकर खर्च किए थे। जबकि इस बार के चुनाव में ये पांच हजार करोड़ से अधिक खर्च होने की संभावना है।
2009 की तुलना में 2014 में तिगुना हुआ खर्च
2009 के आम चुनाव की तुलना में 2014 के आम चुनाव के खर्चे में तीन गुना अधिक का खर्च आया था। पिछले लोकसभा चुनाव में 35,000 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, यानी प्रत्येक मतदाता 46 रुपये से अधिक का खर्च।
1989 में 100 करोड़ का आंकड़ा हुआ पार
1989 के आम चुनावों में पहली बार चुनावी खर्च का आंकड़ा 100 करोड़ के पार गया था। इस चुनाव में 154 करोड़ 22 लाख रुपये खर्च हुए थे।
2004 में एक हजार करोड़ का आंकड़ा हुआ पार
2004 के लोकसभा चुनाव में एक हजार करोड़ रुपये के पार का चुनावी खर्च आया था। इन चुनावों में 1016.08 करोड़ रुपये का खर्च आया था।
आयोग का किस-किस चीज में होता है खर्चा
- सुरक्षा व्यवस्था
- पोलिंग स्टेशन की स्थापना
- मतदान और मतगणना में लगे कर्मियों को भत्ता
- अस्थाई टेलिफोन लाइन में खर्च
- मतदाता की उंगुली पर लगाई जाने वाली अमिट स्यायी
- अमोनिया पेपर खरीदना
चुनावी खर्च में अमेरिका को पीछे छोड़ता भारत
चुनावी खर्च के मामले में इस बार के आम चुनाव अमेरिका जैसे कई विकसित देशों को पीछे छोड़ने जा रहा है। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के अनुमान के मुताबिक, 2019 के आम चुनाव में 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये तक का खर्च हो सकता है। बता दें कि इस बार के चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में संपन्न होंगे। जबकि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की बात करें, तो आंकड़े बताते हैं कि इन चुनावों में 46,211 करोड़ रुपये यानी 650 करोड़ डॉलर खर्च हुए थे।
90 करोड़ मतदाता करेंगे वोट
2019 के आम चुनाव में करीब 90 करोड़ मतदाता वोट करेंगे। ऐसे में चुनाव आयोग पर चुनावी खर्चे का बोझ भी बढ़ेगा। करीब 22 करोड़ की आबादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में लगभग 14 करोड़ 40 लाख मतदाता हैं। इनमें से आधे से ज्यादा (करीब 8 करोड़) युवा मतदाता हैं।
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Source: IOCL
























