उत्तराखंड की महिलाओं के लिए दिल्ली अभी दूर... जानिए- क्या है कारण
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा, आधी आबादी आज भी राजनीतिक न्याय के इंतजार में हैं।

एबीपी गंगा, देहरादून। संसद में राजनीतिक दल महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण की वकालत काफी लंबे वक्त से करते रहे हैं, लेकिन जब उन्हें चुनाव में टिकट देने की बात आती है तो ये बातें झूठी सी लगती है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा, आधी आबादी आज भी राजनीतिक न्याय के इंतजार में हैं। उत्तराखंड से कुल इस बार कुल 52 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि भाजपा ने टिहरी सीट राजघराने की माला राज्यलक्ष्मी शाह को टिकट दिया है। राज्यलक्ष्मी को टिकट देने की वजह टिहरी सीट पर राजघराने का दबदबा भी है। एक दो बार को छोड़ दें तो यह संसदीय सीट 1952 से इसी शाही घराने के पास रही है। बतादें भाजपा की माला राज्यलक्ष्मी के अलावा मैदान में पांच निर्दलीय महिला उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
6 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक हैं महिला वोटर राज्य में 77 लाख से ज्यादा मतदाता है और इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से मात्र साढ़े तीन लाख ही ज्यादा है। यानी आधी आबादी महिलाओं की है और टिकट एक चौथाई भी नहीं। वो भी तब जब कुछ विधानसभा सीटों में महिला वोटर की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है। खास तौर पर प्रदेश की अल्मोड़ा व पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट की छह विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां महिलाएं निर्णायक भूमिका में हैं। इनमें चौबट्टाखाल, केदारनाथ, धारचूला, डीडीहाट, पिथौरागढ़ और द्वारहाट शामिल हैं। इसके अलावा पांच विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां पुरुष व महिला मतदाताओं के बीच एक हजार का अंतर भी नहीं है।
पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टिहरी से माला राज्य लक्ष्मी शाह को टिकट दिया था और कांग्रेस ने हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को हरिद्वार से चुनावी समर में उतारा था। टिहरी से भाजपा की महिला प्रत्याशी मालाराज्य लक्ष्मी शाह तो जीत गयी, लेकिन हरिद्वार से कांग्रेस की रेणुका भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक से पराजित हो गई। इस बार भी कांग्रेस में एक महिला को टिकट देने की बात तो हुई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। नैनीताल-उधमसिंहनगर संसदीय क्षेत्र से उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेश प्रबल दावेदार थी लेकिन बाजी हरीश रावत के हाथ लगी। इंदिरा विशुद्ध राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश के जमाने से विधायक निर्वाचित होती आ रही हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार में वह संसदीय कार्यमंत्री से लेकर पीडब्लूडी मंत्री तक रही है।
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Source: IOCL
























