कोटा: 'अब जीने की ताकत...', प्रसूताओं ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु, डिलीवरी के दौरान हुई थी किडनी फेल
Kota News In Hindi: राष्ट्रपति को लिखे पत्र में महिलाओं ने बताया कि वे जिला प्रशासन, सांसद और राज्य सरकार के सामने कई बार गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और नकली दवाओं के इस्तेमाल से किडनी फेल होने का आरोप लगाने वाली पांच प्रसूताओं ने अब देश की राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है. इन महिलाओं का कहना है कि महीनों से इलाज, दर्द और आर्थिक तंगी के बीच उनकी जिंदगी बद से बदतर हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें न तो न्याय मिला और न ही कोई स्थायी राहत.
पीड़ित महिलाओं ने अपने ज्ञापन में कहा है कि उनका प्रसव 4 से 7 मई के बीच न्यू मेडिकल कॉलेज, कोटा में हुआ था. आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के इस्तेमाल से उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं. इस पूरे मामले में पहले ही पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि वे खुद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं.
'सांस लेने में भी हो रही दिक्कत'
महिलाओं का कहना है कि वे पिछले दो महीने से बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में जी रही हैं. उनकी किडनी काम नहीं कर रही हैं, फेफड़ों में पानी भर गया है, सांस लेने में दिक्कत होती है और अक्सर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहना पड़ता है. हर 48 घंटे में डायलिसिस कराना पड़ रहा है, जो शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद पीड़ादायक है.
'हम परिवार पर बोझ बन गए'
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इस हादसे ने उनकी आर्थिक स्थिति भी पूरी तरह तोड़ दी है. कई महिलाओं के पति निजी काम-काज छोड़कर उनकी देखभाल में लगे हैं, जिससे परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. उनका कहना है कि वे अब अपने परिवार पर बोझ बनकर रह गई हैं.
किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की
ज्ञापन में महिलाओं ने बताया कि वे जिला प्रशासन, सांसद और राज्य सरकार के सामने कई बार गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका. उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि या तो उनका तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके.
'अब जीना बेहद मुश्किल'
पीड़ित महिलाओं ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि शासन-प्रशासन उन्हें न्याय दिलाने में असमर्थ है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए, क्योंकि अब उनके लिए इस पीड़ा के साथ जीवन जीना बेहद मुश्किल हो गया है.
अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा
बता दें कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने आई प्रसूताओं की किडनी फेल होने से लगातार हो रही मौतों पर राज्य के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी एक्स पर पोस्ट कर दुख जताया और साथ ही सरकार पर निशाना भी साधा. उन्होंने एक्स पर लिखा है, "राजस्थान में आज सत्ता के अहंकार ने इंसानियत और संवेदनाओं को मार दिया है. अस्पतालों में सरकारी लापरवाही से प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतें हृदय विदारक हैं, लेकिन सरकार सिर्फ लीपापोती में मस्त है."





















