हवाई हमले... और लोगों का रेस्क्यू! राजस्थान में मॉक ड्रिल, जयपुर समेत कई शहरों में ब्लैकआउट
Rajasthan Mock Drill: जयपुर में यह मॉक ड्रिल शहर के खातीपुरा ग्राउंड पर आयोजित की गई. यहां आसपास घनी आबादी है. सायरन बजते ही लोगों ने घरों की खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लिए.

Mock Drill in Rajasthan: राजधानी जयपुर समेत राजस्थान के सभी जिलों में शनिवार (31 मई) को मॉक ड्रिल की गई. हवाई हमला होने या किसी दूसरी तरह का अटैक होने की सूरत में किस तरह राहत और बचाव के काम किए जाने हैं, मॉक ड्रिल के जरिए इस तैयारी को परखा गया. जयपुर में यह मॉक ड्रिल शहर के खातीपुरा ग्राउंड पर आयोजित की गई. यहां आसपास घनी आबादी है.
शाम पांच बजे सायरन बजते ही लोगों ने घरों की खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लिए. यहां कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि हवाई हमला किया गया है और कई लोग उसकी जद में आ गए हैं. सूचना पर पुलिस, प्रशासन फायर ब्रिगेड, नगर निगम स्वास्थ्य विभाग समेत कई दूसरे विभागों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. कुछ ही देर में सेना के कमांडो भी मौके पर पहुंच गए. यहां हुए हमले में आठ लोग घायल हो गए थे, जबकि एक शख्स की जान चली गई थी.
मॉक ड्रिल में कौन-कौन हुए शामिल?
मॉक ड्रिल में सेना के साथ ही सिविल एडमिनिस्ट्रेशन, पुलिस सिविल डिफेंस, हेल्थ डिपार्टमेंट और फायर ब्रिगेड समेत कई दूसरे विभागों के लोग शामिल हैं. क्विक रिस्पांस टीम की मुस्तैदी को परखा और बेहतर किया गया है. हवाई हमले में घायल हुए लोगों को जल्द से जल्द कैसे इलाज मुहैया कराया जाना है, इसका मॉक ड्रिल किया गया है.'' सेना, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की गाड़ियां दिखीं.
आपात स्थिति में लोगों को किया गया रेस्क्यू
इसके साथ ही फंसे हुए लोगों का रेस्क्यू कैसे करना है, आग को कैसे बुझाना है, लोगों को कैसे घर के अंदर ही रहने के लिए कहना है, इन सबका रिहर्सल किया गया ऊंची बिल्डिंग में फंसे हुए लोगों में कुछ को रस्सियों के सहारे उतारा गया तो कुछ को हाइड्रॉलिक लिफ्ट से मदद दी गई. इस दौरान पूरे इलाके में पुलिस, प्रशासन, सेना, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की गाड़ियां ही गाड़ियां नजर आईं.
टीमों ने वहां पहुंचते ही अपना-अपना काम शुरू कर दिया. किसी ने आग बुझाई तो कोई घायलों का उपचार करने लगा. फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आईं. एक बिल्डिंग की छत पर फंसे हुए लोगों को रस्सियों के सहारे नीचे उतारा गया. इस दौरान कोई हादसा ना हो, इसलिए नीचे जाल लगाया गया था. इसके अलावा एक अन्य बिल्डिंग में फंसे लोगों को हाइड्रॉलिक लिफ्ट के सहारे सुरक्षित उतारा गया.
मॉक ड्रिल खत्म होने के बाद ब्लैकआउट कार्यक्रम
इस दौरान आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग खुद को अपने घरों में ही कैद किए रहे. मॉक ड्रिल का यह पूरा कार्यक्रम जिला कलेक्टर डॉक्टर जितेंद्र सोनी की निगरानी में करीब एक घंटे तक चला. मॉक ड्रिल खत्म होने के बाद रात सवा आठ से साढ़े आठ बजे तक खातीपुरा इलाके में ही ब्लैकआउट का कार्यक्रम हुआ. करीब 18 मिनट तक कुछ इलाकों में पूरी तरह ब्लैकआउट रहा.
ब्लैकआउट को लेकर सिविल डिफेंस और पुलिस की तरफ से पहले ही अनाउंसमेंट कर दिया गया था. इस दौरान घरों और दुकानों की लाइट पूरी तरह बंद रहीं. सड़कों पर हेडलाइट बंद कर गाड़ियां चलीं. सिविल डिफेंस के रेंज वार्डन पीके भार्गव के मुताबिक मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट के जरिए लोगों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार और जागरूक करना था. लोगों ने भी इसमें अच्छा सहयोग किया.
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Source: IOCL






















