Dungarpur News: लक्ष्मण राजपूत छात्रावास विवाद में आया फैसला, पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह बोले- सत्य की जीत
Dungarpur News In Hindi: डूंगरपुर के श्री लक्ष्मण राजपूत छात्रावास को लेकर सालों से चल रहे विवाद में ADJ कोर्ट ने ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया है.

राजस्थान के डूंगरपुर शहर में पुराना बस स्टैंड के पीछे स्थित श्री लक्ष्मण राजपूत छात्रावास को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद का अंत हो गया है. एडीजे (ADJ) कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए छात्रावास और उससे जुड़ी पूरी भूमि को 'श्री लक्ष्मण राजपूत छात्रावास ट्रस्ट' की संपत्ति माना है. कोर्ट के इस निर्णय के बाद वर्षों से चले आ रहे विवाद पर विराम लग गया है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पूर्व राजपरिवार और क्षत्रिय समाज ने खुशी जाहिर करते हुए इसे सत्य, न्याय और समाज की एकता की जीत बताया है.
'कुछ लोगों ने समाज को किया था गुमराह'
कोर्ट के फैसले के बाद छात्रावास परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व राजपरिवार के महारावल एवं पूर्व राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "अदालत के फैसले ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई को स्वीकार करते हुए ट्रस्ट के अधिकार को मान्यता दी है. कुछ लोगों ने समाज को गुमराह कर छात्रावास पर कब्जा करने और स्वामित्व को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया."
शिक्षा और समाज सेवा के लिए होगा इस्तेमाल
पूर्व सांसद ने इसे न्यायपालिका पर विश्वास की जीत बताते हुए कहा कि अब छात्रावास का संचालन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस छात्रावास की स्थापना शिक्षा और समाज सेवा के उद्देश्य से की गई थी, और भविष्य में भी यह समाज व विद्यार्थियों के हित में ही संचालित होगा.
आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए यहां बेहतर आवासीय सुविधाएं और शानदार शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके.
'यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, पूरे समाज की धरोहर'
पत्रकार वार्ता में मौजूद अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (डूंगरपुर) के जिलाध्यक्ष करणीराज सिंह चौहान (बिछीवाड़ा) ने भी फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोगों ने ही भ्रम फैलाकर छात्रावास पर अधिकार जताने की कोशिश की थी, जो अब समाप्त हो गई है.
उन्होंने अपील करते हुए कहा, "छात्रावास किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर है. अब सभी लोग एकजुट होकर इसके विकास और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सहयोग करें."
समाज में खुशी की लहर
कोर्ट के फैसले के बाद छात्रावास परिसर में मौजूद क्षत्रिय समाज के लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी. इसे वर्षों पुराने विवाद का न्यायपूर्ण अंत बताते हुए लोगों ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत के निर्णय के बाद छात्रावास के संचालन और विकास के नए अध्याय की शुरुआत कैसे होती है.
























