Rajasthan: राजस्थान में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में घोटाला! बिना काम, लाखों का बिल?
Rajasthan News: राजस्थान के आबूरोड में बिना कार्य किए एनीकट निर्माण की सूचना चस्पा की गई. जल ग्रहण विकास विभाग ने इनकार किया. XEN ताराचंद शर्मा ने जांच का आश्वासन दिया. पूरे मामले में कई अहम सवाल हैं.

राजस्थान के आबूरोड क्षेत्र में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत बिना कार्य किए ही एनीकट निर्माण की सूचना चस्पा करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग, आबूरोड के नाम वासाडा गांव में एक जगह पर एनीकट निर्माण की सूचना चस्पा की गई है.
यह कार्य पूर्व में भी करीब छह लाख की लागत से ग्राम पंचायत वासाडा ने करवा दिया था. दरअसल, वासाडा ग्राम पंचायत ने 2023-24 में करीब छह लाख रुपये की लागत से एक एनीकट निर्माण कराया था. अब उसी जगह पर जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग, आबूरोड के नाम से एक सूचना चस्पा कर दी गई है.
करीब 10 लाख रुपये में यह कार्य हुआ
इसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत एनीकट निर्माण किया गया है और करीब दस लाख रुपये में यह कार्य हुआ. साथ ही महादेव कंस्ट्रक्शन कंपनी, नागौर का नाम भी उस पर अंकित है.
जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग, आबूरोड के AEN प्रवीण कुमार ने स्पष्ट किया कि यह सूचना विभाग से नहीं लिखी गई और न ही इस कार्य का कोई भुगतान किया गया है. वहीं, XEN ताराचंद शर्मा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया.
सरकारी धन दुरुपयोग और मिली भगत की आशंका
इस पूरे मामले में कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं, यह सूचना विभाग के नाम किसने और किसके कहने पर लिखी? जबकि मौके पर काम ही विभाग से नहीं किया गया, फिर यह सब किसके संरक्षण में हुआ? यदि विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, तो सूचना लिखवाने वाले के विरुद्ध अब तक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ऐसे में विभागीय जिम्मेदारों के मिलीभगत की भी आशंका है. क्या यह सरकारी धन का दुरुपयोग करके स्वयं के जेब भरने की कोई कोशिश थी? यदि ऐसा नहीं था, तो अभी तक विभाग इस पर खामोश क्यों है? सूचना लिखवाने वाले के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई?
जल स्वावलंबन अभियान और योजनाओं की जांच आवश्यक
यदि पिछले 5 सालों में आबूरोड पंचायत समिति के अधीनस्थ ग्राम पंचायत क्षेत्र में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान और अन्य सरकारी योजनाओं में किए गए कार्यों की भी जांच की आवश्यकता है, ताकि किसी अन्य अनियमितता का पता चल सके.
वास्तव में, योजनाओं में काम हुआ है या यूं ही राजकीय धन के दुरुपयोग करने का खेल कोई चला रहा है. यदि इस पर राज्य सरकार गंभीरता दिखाकर जांच करवाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है.
जांच और कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी
जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के XEN ताराचंद शर्मा ने मामले पर संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की जांच करने की बात कही है. अब यह देखना बाकी है कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यह खेल क्षेत्र में और कहां-कहां हुआ है.
इसकी जांच भी करने की आवश्यकता है. मामला सिर्फ एक एनीकट निर्माण का नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही, पारदर्शिता और सरकारी धन के सही उपयोग से जुड़ा हुआ है. जांच और कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं.
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